मध्य प्रदेशशहडोल दर्पण

मध्य प्रदेश शासन उच्च शिक्षा विभाग के आदेशानुसार स्वामी विवेकानंद कैरियर मार्गदर्शन

शहडोल

शहडोल जबलपुर दर्पण। जयसिंहनगर प्रकोष्ठ के तत्वावधान व महाविद्यालय के ऊर्जावान प्राचार्य डॉ धर्मेंद्र कुमार द्विवेदी जी के नेतृत्व में दिनांक 1 सितंबर 2025 से 14 सितंबर 2025 तक चल रहे राजभाषा हिंदी दिवस के पाक्षिक कार्यक्रम की कड़ी में आज दिनांक 09सितंबर 2025 को पंडित अटल बिहारी वाजपेई शासकीय महाविद्यालय जयसिंहनगर में व्याख्यान माला का आयोजन हुआ जिसमें मुख्य वक्ता के रूप में पंडित शंभू नाथ शुक्ला विश्वविद्यालय शहडोल के सेवानिवृत्त हिंदी विभाग के प्राध्यापक वा हिंदी के विद्वान डॉ. विनोद कुमार जायसवाल जी सम्मिलित हुए । कार्यक्रम का शुभारंभ वाग्देवी मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष सम्माननीय अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वल एवं पुष्प अर्पण कर किया गया। मुख्य अतिथि जी का स्वागत श्रद्धेय प्राचार्य महोदय जी द्वारा बैज लगाकर किया गया।छात्राओं द्वारा स्वागत गीत प्रस्तुत किया गया । स्वागत उद्बोधन महाविद्यालय के वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ यदुवीर मिश्रा जी द्वारा किया गया ।अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में श्रद्धेय प्राचार्य महोदय जी ने सदन में उपस्थित सभी छात्र-छात्राओं एवं महाविद्यालय के अधिकारियों कर्मचारियों को अपनी मातृ भाषा हिन्दी के प्रति जागरूक एवं संवेदनशील रहने तथा राजभाषा,राज्य भाषा,एवं राष्ट्र भाषा में भेद बतलाते हुए विविध विद्वानों , कलमकारों एवं साहित्यकारों के संदर्भ ग्रंथों का अध्ययन करने के लिए प्रेरित किया एवं अपने महाविद्यालयीन पुस्तकालय में संबंधित पुस्तकों की उपलब्धता की जानकारी भी साझा किया तथा आए हुए सम्माननीय अतिथि बृंद का स्वागत उद्बोधन भी दिया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ता डॉ जायसवाल जी ने हिंदी के इतिहास को खंगालते हुए इसके विकास क्रम एवं इसका विस्तार 3500 वर्षों से 1500 ईपू.वैदिक संस्कृति ,1500 से 1000 ईपू.लौकिक संस्कृति,(पाणिनि काल),500 ईपू. से 1 ई. तक पाली भाषा, 1ई.से 500 ई. प्राकृत भाषा तथा 500 ई. से 1000 ई. तक अपभ्रंश भाषा या संपर्क भाषा के रूप में चिह्नित किया l डॉ जायसवाल जी ने किसी भी भाषा को संस्कृति परंपरा का प्रसाद कहके संबोधित किया l अपने पूरे व्याख्यान में डॉ.जायसवाल जी भाषाई बाधाओं ,इसकी विसंगतियों के बीच हिंदी का अपने अस्तित्व के लिए किए गए संघर्ष एवं राजनैतिक वा संवैधानिक इतिहास का विस्तृत वृत्तांत बतलाया l डॉ जायसवाल जी ने अपने वक्तव्य के अंत में अंतरराष्ट्रीय मंच व विश्व पटल पर हिंदी के बढ़ रहे प्रभाव वा इसकी सार्वभौमिकता को स्वीकार्य किया ।अपने वक्तव्य के अंत में हिंदी को राष्ट्र की प्रतीक भाषा के रूप में स्थापित होने की शुभकामना दी तथा कविता के साथ अपनी बात को संपन्न किया तथा भाषा को मानवीय सरकारों का आधार बताया l कार्यक्रम में आभार ज्ञापन का दायित्व निर्वाहन डॉ जसीम अहमद जी ने किया ।मच का सफल संचालन कार्यक्रम की सहसंयोजक डॉ अर्चना जायसवाल जी ने किया ।इस कार्यक्रम में विवेकानंद कैरियर मार्गदर्शन प्रकोष्ठ की संयोजक डॉ. प्रमिला वास्केल सहित महाविद्यालय परिवार समस्त छात्र छात्रा तथा डॉ उत्तम सिंह, डॉ. लवकुश दीपेंद्र डॉ.आदित्य शुक्ला,डॉ दिलीप शुक्ला ,डॉ.मुनव्वर अली, डॉ मुकेश सिंह, डॉ अलीमा सिद्दकी, डॉ. जीतेंद्र साकेत,डॉ.महेंद्र साकेत,डॉ.प्रीति रजक. डॉ.सुरेश चौधरी,डॉ. राजेंद्र साकेत , डॉ.रामपाल डॉ.रागिनी गुप्ता, सुश्री दीपक रानी मिश्रा ,श्रीमती लक्ष्मी कोल,मोहम्मद आतिफ डॉ.नूर मोहम्मद,श्री अजीत कुशवाहा ,श्री रामनरेश चौधरी , श्री प्यारे लाल प्रजापति श्री अनिल वर्मा,श्री मनोज प्रजापति,श्री सितेंद्र पयासी,श्री विपिन गुप्ता ,श्री श्रवण मिश्रा ,श्री मनीष साकेत ,श्री देवेंद्र साकेत ,श्री रामनारायण , श्री अमित यादव ,श्री राहुल तिवारी,श्री दुर्गा दास सहित अन्य कर्मचारी सक्रिय रूप से सहभागी रहे ।

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