जंगलों में लग रही आग से निपटने में नाकाम वन अमला

लालबर्रा वन परिक्षेत्र अंतर्गत सोनवानी के जंगलों का मामला
लालबर्रा। लालबर्रा क्षेत्र के वनों में हाल ही में दक्षिण वन मंडल बालाघाट के लालबर्रा के परिक्षेत्र अंतर्गत आने वाला वह हिस्सा जो कान्हा पेंच कारीडोर कहलाता है। जिस स्थान को वन्य जीव प्राणी अनुभूति केंद्र के रूप में सरकार विकसित कर रही है। जहां पर प्रतिदिन सैकड़ों की संख्या में पर्यटक पहुंच कर वन्य प्राणियों को देख कर आनंद की अनुभूति करते हैं इस क्षेत्र का नाम है सोनेवानी का जंगल जहां पर भीषण आग लग गई और उसे बुझाने में वन विभाग के अमले को 4 से 5 दिन का समय लगा। आग कैसे लगी इसका कारण विभागीय अधिकारियों द्वारा अभी तक बताया नहीं गया है मीडिया कर्मियों को जब इस बात की खबर लगी तो उन्होंने परिक्षेत्र अधिकारी बाबूलाल चढार से बार-बार दूरभाष पर बात कर इस बात की जानकारी लेनी चाही कि किस बीट में, कौन-कौन से कक्ष में कितने एरिया तक आग फैल गई है, और आग लगने का कारण क्या है। तो इन सब सवालों से बचते हुए उन्होंने फोन रिसीव ना कर अपना फोन बंद कर दिया। जिससे कहीं ना कहीं इनकी लापरवाह कार्यप्रणाली समझ में आ रही है। आपको बता दें कि जिन वाहनों से पर्यटक जंगल की सैर करने जाते हैं। बीड़ी सिगरेट माचिस सब जंगल में ले जाने की अनुमति इनके द्वारा दी जाती है। जबकि इन्हें अच्छे से मालूम है कि गर्मी के इस दौर में सूखे पत्तों में एक आग का तिनका भी चिंगारी बनकर आग का भीषण रूप ले सकता है तो फिर जंगलों की ओर जाने वाले पर्यटकों को नाको के ऊपर उनकी तलाशी लेते हुए ज्वलनशील पदार्थ जंगलों में ले जाने की अनुमति ना दे,ख् वही महुआ बीनने वाले वनग्राम के लोगों को भी समझाइस दे कि वे महुआ के पेड़ के नीचे आग ना लगायें, साथ ही साथ विभाग के अधिकारी और कर्मचारी घर में सोने की वजह तत्परता के साथ जंगलों को बचाने के लिए अपनी ड्यूटी में लगे रहे।



