तालाबों ,कुआँ व तलैयों का आतिस्त्व खतरे में

जबलपुर/सिहोरा। जिलों सहित तहसील कार्यालय से लेकर ग्रामीण इलाकों में तालाबों की हालत खराब होने के साथ साथ इसका धीरे धीरे महत्व खत्म होता नजर दिखाई दे रहा है । जबकि भारत सरकार हर वर्ष जल संरक्षण के लिए उचित व्यवस्था के साथ इन सभी तालाबों की देख रेख में लाखों रुपये खर्च करके इनको सुरक्षित रखने के लिए निरंतर अभ्यास करती हैं । फिर भी इन तालाबों का आतिस्त्व खतरे में जा रहा है । जिससे वाटर लेबल घटता जा रहा है । इसी प्रकार सिहोरा नगर पालिका क्षेत्र के वार्ड क्रमांक – 2 में पटवारी हल्का नम्बर 6 राजस्व निरक्षण मंडल खितौला तहसील सिहोरा खसरा क्रमांक 1330 रकवा 01.154 हेक्टेयर भूमि पर तलैया थी । जो किसी न किसी भूमि स्वामी के नाम से दर्ज कराई गई हैं । पहले भरा होता था इसमें पानी जिससे पानी रहने से आम निस्तार किया जाता था । वहीँ हैडपम्पों व नलकूपों का वाटर लेबल बना रहता था । लेकिन मानव संसाधन की आवश्कता के चलते इन तालाब व तलैयों के साथ कुओ को पुरकर जल स्तर को कम करते दिखाई दे रहा है ।
आम जनता की ओर से जल हित में सुधार करने को लेकर वार्ड क्रमांक – 2 निवासी राजाराम पिता स्व: चेतराम विश्कर्मा ने सिहोरा तहसील कार्यालय में लिखित रूप से आवेदन पत्र लिखकर कर न्यायालय से इन तालाब तलैयों की सुरक्षा व्यवस्था करने की मांग की है । अंजुमन स्कूल के पीछे थी तलैया , अब बन गया हैं समतल भूमि स्थान – देखा जाये तो नगर में कई तालाबों तलैया और कुआ को पूर कर लोगों के द्वारा मकान निर्माण के साथ साथ प्लाटिंग का कार्य किया जा रहा है । जिससे इन जल संरक्षण की धरोहरों का आतिस्त्व खत्म हो दिखाई देता नजर आ रहा है ।
शासकीय कार्यालयों में कागजों में दर्ज हैं रिकॉर्ड लेकिन वास्तविकता में नहीं बचे हुए हैं तालाब कुआँ तलैया । अब जिस प्रकार से जिला मुख्यालय द्वारा इनकी सुरक्षा व्यवस्था के साथ साफसफाई का कार्य किया जाता हैं वह भी बड़ा महत्वपूर्ण योगदान जैसा होता हैं ।
आवेदक ने न्यायालय में लगाई गुहार – सिहोरा वार्ड क्रमांक – 2 रहवासी राजाराम पिता स्व: चेतराम विश्कर्मा ने न्यायालय की सरण में आवेदन पत्र लिखकर इन जल संरक्षण की धरोहर को बचाने के लिए गुहार लगाई है । अब देखना है कि इस दौरान न्यायालय पीड़ित व्यक्ति की बात पर क्या कार्यवाही करता है ।
मनीष श्रीवास रिपोर्टर जबलपुर मध्यप्रदेश



