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मंडला कंक्रीट सड़क, पहाड़ी की मुरुम गिरी रोड पर

जबलपुर संवाददाता। जानता के खून पसीने की कमाई से सरकारों को दिया जाने वाला टैक्स के पैसा से जबलपुर मंडला रोड़ अपना,दर्द बयां करती है। मंडला सड़क जिसके निर्माण का बजट 990 करोड़ रुपए था उससे क्या क्या खेल, खेले गए कैसे एक खूबसूरत हरियाली भरे सफर को दुश्वारियों में ढकेला गया कैसे प्रकृति का चीरहरण किया गया मैं यह नहीं कहता कि इसके कुसूरवार सिर्फ सिस्टम हैं। इस प्राकृतिक एवं सामाजिक, आर्थिक और मानसिक विध्वंस का पहला अपराधी वह इंजीनियर और उसकी टीम है जिसने चूल्हा गोलाई से चिल्पी तक सिर्फ टू लेन सड़क के लिए ऐसी डिजाइन बनाई कि लाखों वृक्षों का कत्ल हो गया, पहाड़ खोद दिए गए। दूसरा अपराधी वह ठेकेदार है जिसने साधन विहीन होते हुए भी येन-केन प्रकारेण ठेका हथिया लिया फिर पेटी ठेके की सहायता से काम को पूरा किया।
तीसरा अपराधी वन विभाग है जिसकी लाल फीताशाही में जमीन अधिग्रहण में देरी हुई चौथा और सबसे बड़ा अपराधी MPRDC का वो हेड है, जिसकी कमीशनखोरी के चक्कर में ठेकेदार और पेटी ठेकेदारों के काम की गति और गुणवत्ता पर कभी किसी ने भी नजर नहीं डाली गई और अब सांसद और मंत्री इन अपराधियों के अपराध की सजा भुगतेंगे क्योकि जनता मे अत्याधिक रोष है क्योंकि बरसों बरस इस सड़क पर चलते हुए जब लोगो ने जो हिचकोले खाएँ थे, और अब ग्राम पंचायत की सीसी रोड से बदतर हाईवे को देखेंगे तो सिर्फ और सिर्फ सरकारो को जनता दोषी मानती है।
ध्यान रखिए साहब, यह दाग बहुत लंबे समय तक धुलने वाला नहीं है, क्योंकि कंक्रीट की सड़क की उम्र बहुत लंबी होती है, और सरकारों की कम होती हैं। अंतिम विकल्प यही है कि कुछ ऐसा पुरुषार्थ करके दिखाएं, कि मंडला जबलपुर सड़क की दुर्गति करने वालों को सजा मिले।



