धान की नर्सरी तैयार करने से पहले जैविक विधि से करें बीजों उपचार

डिंडोरी,जबलपुर दर्पण ब्यूरो। जैविक विधि से खेती करके किसानों की पैदावार बढ़ सकती है और किसानों की आय में भी बढ़ोतरी होना निश्चित है,लेकिन जिले के अधिकतर किसान जैविक विधि से खेती ना करके रसायनिक खादों का लगातार उपयोग करके कीमती जमीनों को नष्ट करते जा रहे हैं। जिले के किसानों को जागरूक करने की दिशा में जैविक कृषि प्रशिक्षक बिहारी लाल साहू द्वारा जैविक विधि से धान के बीजों का उपचार कर खेती करने के लिए किसानों को प्रेरित कर रहे हैं, लेकिन जिले के किसानों में जन जागरूकता का अभाव लंबे समय से बना हुआ है, जो जैविक विधि से खेती करने के बारे में ज्यादा रुचि नहीं रह रहे, जिससे जिले के किसानों की पैदावार पर भी असर पड़ रहा है।
किसान कैसे करें धान के बीजों का उपचार-एक बड़े बर्तन में धान को सबसे पहले पानी में डूबकर पानी में तैरती धान को सबसे पहले अलग कर दें, बर्तन के नीचे सतह पर बैठे धान को निकालकर हल्का सुखाने के बाद उसमें गौमूत्र व गोबर से मिलाकर लगभग 10 मिनट तक सूखा कल इकट्ठा कर ले। ऐसा करने से धान बुवाई के बाद धान के बीज नष्ट होने की कम संभावना रहती हैं,पूरी तरह से बीजों में अंकुरित आती है। धान मे गोबर मिलाकर वुबाई करने से चिड़ियों की चुनाई से भी बचाया जा सकता है,धान के ऊपरी परत पर गोबर लगने से चिड़िया नहीं खाती।नर्सरी तैयार करने के लिये भूमि का स्थान चैयन करें,भूमि हल्का ढलान हो या जिस खेत का स्थान पर ऊंचे हो पानी ना भरे ऐसा जगह पर नर्सरी तैयार करना चाहिए जब धान 14 दिन से ऊपर और 21 दिन के अंदर का हो जाए तो धान की रोपाई कर देना चाहिए, जिससे धान अपनी जड़ सही समय में फैलाकर अधिक मात्रा में शाखाएं निकाल सके, किसानो को धान की रोपाई 25 सेमी. की दूरी पर करना चाहिए।



