ब्रिज कम्पनी के आगे नतमस्तक हुआ प्रशासन

दूसरे जिले की अपेक्षा गाडरवारा ब्रिज मामले में नही हुई कार्यवाही
उज्जैन के तराना में ब्रिज का हिस्सा गिरने पर हुई कार्यवाही , लेकिन गाडरवारा ब्रिज में अनदेखी क्यूँ

पवन कौरव गाडरवारा। उज्जैन जिले की कालीसिंध नदी पर बन रहे सेतू विभाग और ठेकेदार द्वारा ब्रिज का निर्माण किया जा रहा है उज्जैन झालावाड़ नेशनल हाईवे के ग्राम पाठ के पास काली सिंध पर बन रहे इस ब्रिज के विगत दिवस एक हिस्सा गिरने से छह मजदूरों के घायल होने में सेतु निगम के अधिकारी और ठेकेदार की बड़ी लापरवाही सामने आई जिस वक्त ब्रिज की स्लैब भारी जा रही थी उस दौरान सेतु निगम के ना तो एसडीओ रविंद्र कटारिया मौजूद थे और ना ही सब इंजीनियर रघुनाथ रघुवंशी । ब्रिज की स्लिप गिरने से 5 व्यक्ति घायल हुए हैं वही एक कि मौत मलबे में दबने से मौत हो गई।
ऐंसे ही एक वाक्या से हम आपको रूबरू कराते है जिसे लगभग दो माह बीत गए लेकिन वह अभी भी भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ते दिखाई पड़ रहा है । गाडरवारा रेलवे स्टेशन से चीचली व एनटीपीसी की ओर जाने वाले राहगीरों को रेलवे फाटक पर घण्टो खड़े होकर गेट खुलने का इंतजार करना पड़ता था एवं कई इमरजेंसी जैसी स्थिति में कई मरीजों को अपना दम तोड़ने पड़ता था । क्षेत्रवासियों की मांग पर रेलवे गेट पर ओवर ब्रिज बनाने की मांग उठी जिसके चलते क्षेत्रीय सांसद की मेहनत के परिणाम स्वरूप ब्रिज की अनुमति प्रदान हुई जिससे क्षेत्रवासियों में काफी हर्ष उल्लास देखने को मिला लेकिन किसे पता था कि विकास नाम का ये ब्रिज भी भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाएगा और हुआ भी यही जो ब्रिज अब तक बनकर तैयार नहीं हुआ उसके पल्ले भरभरा कर धराशाई होने लगे जबकि उसमें किसी प्रकार का अभी लोड है ही नहीं , बावजूद इसके यह बैठक ले गया मानो यहां व्रिज नहीं बल्कि कच्ची सड़क हो । जिसमें कहीं ना कहीं भ्रष्टाचार की बू आती नगर नजर दिख रही है। रेलवे जैसे मंत्रालय विभाग में ऐसा वाक्य बहुत ही कम देखने को मिलता है लेकिन यह हादसे ने रेलवे विभाग की भी कहीं ना कहीं गुणवत्ता पर सवालिया निशान खड़े किए हैं, जबकि रेल मंत्रालय अपनी कार्यशैली अपनी सुरक्षा मजबूती के लिए सभी मंत्रालय विभागों के लिए एक प्रेरणादाई होता है। परंतु यह मामला उदगार होने से बहुत से प्रश्न निकाल कर सामने आ रहे हैं । प्रशासन ने की लीपापोती , 2 माह बीत जाने के बाद भी नही हुई लापरवाह अधिकारियों व ठेकेदार पर कार्यवाही ।
पांच मजदूर हुए घायल , एक मजदूर कि हुई मौत
उज्जैन झालावाड़ नेशनल हाईवे के ग्राम पाठ के पास कालीसिंध नदी पर बन रहे ब्रिज की छत भरने का काम गुरुवार सुबह शुरू हुआ था छत की सपोर्ट देने के लिए लोहे की पाइप की लगाई गई थी दोपहर 3:00 बजे करीब 80 फ़ीसदी छत पर सीमेंट कांक्रीट डाली जा चुकी थी इसके बाद अचानक से ट्रस् अपने स्थान से खिसक गई और पूरी छत नीचे आ गई इस दौरान छत पर मजदूर सीमेंट डालने के लिए का फैलाव करने में लगे हुए थे वह सभी स्लैब गिरते ही नीचे आ गिरे । चुकी जो छत के ऊपर खड़े थे इसलिए मलबे में दबे नहीं और उनकी जान बच गई देर रात मलबे में फंसे एक युवक की मौत हो गई ।
स्थानीय विधायक भी वैठे धरने पर , पुल की गुणवत्ता पर भी उठाए सवाल
कोई घटना की जानकारी लगते ही उज्जैन कलेक्टर आशीष सिंह और एसपी सत्येंद्र कुमार शुक्ल घटनास्थल पर पहुंच कर जानकारी ली स्लेप गिरने से घायल हुए लोगों को न्याय दिलाने के लिए विधायक महेश परमार भी पहुंच गए विधायक उज्जैन झालावाड़ हाईवे पर बीच सड़क पर धरने पर बैठ गए परमार का कहना था कि प्रशासन तत्काल घायल मजदूरों को उधर ₹10 लाख रुपय दिलाये ओर मुफ्त इलाज कराएं और ठेकेदार पर तत्काल कार्यवाही करें विधायक नहीं ब्रिज की गुणवत्ता पर भी प्रश्नचिन्ह उठा है ।
उज्जैन कलेक्टर ने इंजीनियर को किया निलंबित , ठेकेदार पर प्रकरण दर्ज करने के दिये निर्देश
वही पूरे घटनाक्रम में उज्जैन कलेक्टर आशीष सिंह ने ठेकेदार देवांग भावसार पर प्रकरण दर्ज करने के निर्देश दिए हैं वही सब इंजीनियर सूर्यवंशी को निलंबित कर दिया है । वहीं जांच के लिए जिला कलेक्टर ने मटेरियल जब तक किया है इसके बाद अन्य धाराओं में और प्रकरण दर्ज होने की संभावना है
ब्रिज पूरा बनने से पहले ही गाडरवारा ब्रिज का गिर चुका है एक हिस्सा ।
ऐंसी ही एक घटना लगभग 2 माह पूर्व गाडरवारा रेलवे ब्रिज में देखने को मिली थी हालांकि गनीमत यह रही कि कोई जनहानि नही हुई लेकिन प्रशासन की उदासीनता के चलते ना ही ठेकेदार पर कोई कार्यवाही हुई और ना ही किसी अधिकारी पर ठेकेदार की लापरवाही का खामियाजा गाडरवारा शहर की जनता को भुगतना पड़ रहा है प्रशासन की लापरवाही के चलते प्रदेश में भ्रष्टाचार का रोग बढ़ता ही जा रहा है । प्रशासन सरकार का कोई भी ऐसा विभाग नहीं बचा, जहां भ्रष्टाचार के असुर ने अपने पंजे न गड़ाए हों । हमारा प्रदेश नैतिक मूल्यों और आदर्शों का कब्रिस्तान बन गया है । साथ ही देश की सबसे छोटी इकाई पंचायत से लेकर शीर्ष स्तर के कार्यालयों और क्लर्क से लेकर बड़े अफसर तक , बिना घूस के आज सरकारी फाइल आगे ही नहीं सरकती।
आज के समय में ईमानदारी तो महज एक कहावत बनकर रह गई है । हर क्षेत्र में जब तक जेब से गुलाबी नोट न दिखाये जाए , तब तक हर काम कछुआ चाल से ही चलता है। न जाने कब पूरा होगा ? सब राम भरोसे है ! लेकिन जैसे ही नोटों की गर्मी पैदा होती है , काम की तेजी मे खरगोश सी रफतार आने लग जाती है ।
भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रहा , प्रशासन का उदासीन रवैया
भ्रष्टाचार की दीमकें हमारी सारी व्यवस्था को खोखला कर रही हैं । कभी सोने की चिड़िया कहा जाने वाला भारत आज भ्रष्टाचार के कीचड़ में धंस चुका है । हमारे नैतिक मूल्य और आदर्श सब स्वाहा हो चुके हैं । बढ़ता हुआ भ्रष्टाचार आचरण दोष का ही परिणाम है । आजकल अखबारों , टीवी और रेडियो में एक ही खबर सुनने-देखने को मिल रही है , वह है भ्रष्टाचार की । हर दिन भ्रष्टाचार के काले करनामे उजागर हो रहे हैं । देश में भ्रष्टाचार को मिटाकर सभी नागरिकों को रोटी , कपड़ा और मकान जैसी मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति करना सरकार का काम ही नहीं , बल्कि राजनीतिक धर्म भी होता है । लेकिन आजादी से लेकर अब तक देश की सरकारें भ्रष्टाचार को मिटाने में विफल रही हैं ।
दूसरी तरफ से गिरने को तैयार है गाडरवारा ब्रिज का हिस्सा , लेकिन जिम्मदारों को दिखाई नही देती ब्रिज में छुपी भ्रष्टाचार की सच्चाई
आपको बता दें कि जहां एक तरफ उज्जैन के तराना में कलेक्टर ने एक इंजीनियर को निलंबित किया है वही ठेकेदार के ऊपर एफआईआर करने के भी निर्देश दिए है लेकिन दो माह पूर्व गाडरवारा रेलवे फाटक के यहां बन रहे ब्रिज का एक हिस्सा गिर गया था , परन्तु ना तो ठेकेदार पर कोई कार्यवाही हुई और ना ही जिम्मेदार अधिकारियों पर मगर गौरतलब है कि पुनः दूसरी तरफ का हिस्सा गिरने को तैयार है लेकिन जिम्मदारों को उसकी सच्चाई नजर नही आती शहर के लोगों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करना किसी दिन महंगा ना पड़ जाए । एक तरफ तराना जिला प्रशासन द्वारा कार्यवाही करना तो वही दूसरी ओर नरसिंहपुर जिला प्रशासन द्वारा इसे अनदेखा करना कहां तक जायज है ।



