साहित्य दर्पण

विश्व जनसंख्या दिवस 2021

विश्व जनसंख्या दिवस हर साल एक नई थीमके साथ मनाया जाता है। इस साल की थीम अधिकार और विकल्प उत्तर हैं। चाहे बेबी बूम हो या बस्ट, प्रजनन दर में बदलाव का समाधान सभी लोगों के प्रजनन स्वास्थ्य और अधिकारों को प्राथमिकता देना है। भारत में जनसंख्या नियंत्रण कानून बनाने संबंधी विषय पिछले 3 दिनों से फिर जोरदार रूप से चर्चा में है। करीब-करीब हर टीवी चैनल पर इस मुद्दे पर परिचर्चा हो रही है जिसमें केंद्रीय मंत्रियों से लेकर साधारण सामाजिक कार्यकर्ता भी चर्चा में भाग ले रहे हैं और अपने अपने विचार साझा कर रहे हैं।…साथियों माननीय दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा 7 जुलाई 2021 को जनसंख्या नियंत्रण कानून के संबंध में टिप्पणी पर और उत्तर प्रदेश विधि आयोग द्वारा दिनांक 7 जुलाई 2021 को अपने 18 पृष्ठों और 30 पॉइंटों के जारी यूपी जनसंख्या (नियंत्रण स्थिरीकरण व कल्याण) विधेयक 2021 जिसमें 19 जुलाई 2021 तक जनता से सुझाव मंगाए गए हैं और फिर ड्राफ्ट फाइनल करके सरकार को दिया जाएगा और सरकार अधिसूचना जारी करने के 1 वर्ष में यह कानून लागू कर सकती है। सारे देश में इस मुद्दे पर चर्चा शुरू हो गई है। ऐसे में अगर यह एक्ट लागू हुआ तो दो से अधिक बच्चे पैदा करने पर सरकारी नौकरियों में आवेदन और प्रमोशन का मौका नहीं मिलेगा। इसके साथ ही दो से अधिक बच्चे वालों को 77 सरकारी योजनाओं व अनुदान से भी वंचित रखने का प्रावधान है। अगर यह लागू हुआ तो एक वर्ष के भीतर सभी सरकारी अधिकारियों कर्मचारियों स्थानीय निकाय में चुने जनप्रतिनिधियों को शपथ पत्र देना होगा कि वह इसका उल्लंघन नहीं करेंगे। कानून लागू होते समय उनके दो ही बच्चे हैं और शपथ पत्र देने के बाद अगर वह तीसरी संतान पैदा करते हैं तो प्रतिनिधि का निर्वाचन रद करने व चुनाव ना लडऩे देने का प्रस्ताव होगा। इतना ही नहीं सरकारी कर्मचारियों का प्रमोशन तथा बर्खास्त करने तक की सिफारिश है।…साथियों बात अगर हम जनसंख्या नियंत्रण कानून के इतिहास की करें तो मेरी इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में रिसर्च के अनुसार 1975 में आपातकाल के दौरान नागरिकों के अधिकार छीन लिए गए थे। उस समय केन्द्र सरकार ने आपातकाल में जो फैसले लिए उनमें सबसे विवादास्पद फैसला था पुरुषों की जबरन नसबंदी का।2015 में गोरखपुर लोकसभा से सांसद ने जनसंख्या नियंत्रण की जरूरत पर ऑनलाइन पोल के जरिए लोगों की राय मांगी थी। इस पोल में भाग लेने वाले 80 प्रतिशत से अधिक लोगों ने जनसंख्या नियंत्रण कानून की दरकार बताई थी। जनसंख्या नियंत्रण के लिए अटल बिहारी सरकार की ओर से सन 2000 में गठित वेंकटचलैया आयोग ने कानून बनाने की सिफारिश की थी। इस आयोग के अध्यक्ष सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एमएन वेंकटचलैया थेवेंकटचलैया आयोग ने 31 मार्च 2002 को अपनी रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंपी थी। उधर एक सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील ने दिसंबर 2018 में पीएम को एक पत्र लिखा था। इस पत्र में उन्‍होंने बताया कि जनसंख्‍या विस्‍फोट पर रोक लगाने के लिए जनसंख्या नियंत्रण कानून पर संसद में बहस किए जाने की मांग की और उन्होंने 9 जुलाई 2021 को एक टीवी चैनल में कहा कि उनके द्वारा जनसंख्या नियंत्रण कानून बनाने के संबंध में पांच जनहित याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में पेंडिंग है। हालांकि इस संबंध में केंद्र सरकार देश में जनसंख्या नियंत्रण कानून लागू नहीं करेगी। उसने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देकर कहा है कि वह देश के नागिरकों पर जबरन परिवार नियोजन थोपने के विचार का विरोधी है…। साथियों बात अगर हम दिनांक 7 जुलाई 2021 को यूपी विधि आयोग द्वारा जारी ड्राफ्ट की करें तो, कानून की प्रस्तावना कहती है, यूपी में, सीमित संसाधन है। ऐसे में ये आवश्यक और जरूरी है कि कि फायती भोजन, सुरक्षित पेयजल, सभ्य आवास, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुंच, आर्थिक और आजीविका सहित मानव जीवन की बुनियादी आवश्यकताओं का प्रावधान हो। ऐसे में विकास को बढ़ावा देने के लिए राज्य की जनसंख्या को नियंत्रित करना, स्थिर करना आवश्यक है। राज्य विधि आयोग ने यूपी जनसंख्या (नियंत्रण, स्थिरीकरण और कल्याण) विधेयक-2021 का ड्राफ्ट तैयार कर लिया है। इसमें दो से अधिक बच्चे होने पर सरकारी नौकरियों में आवेदन से लेकर स्थानीय निकायों में चुनाव लड़ने पर रोक लगाने का प्रस्ताव है। सरकारी योजनाओं का भी लाभ न दिए जाने का जिक्र है। मौजूदा ड्राफ्ट में कहा गया है कि जो कोई भी कानून के लागू होने के बाद दो बच्चे के नियम का उल्लंघन करता है, उसे सरकार द्वारा प्रायोजित सभी कल्याणकारी योजनाओं के लाभ से वंचित कर दिया जाएगा, वह स्थानीय निकायों के लिए चुनाव नहीं लड़ सकता, राज्य सरकार के तहत सरकारी नौकरियों के लिए आवेदन करने के लिए योग्य नहीं होगा। ऐसे लोगों को सरकारी नौकरीमें प्रमोशन भी नहीं मिलेगी ड्राफ्ट में आगे कहा गया है कि उसका राशन कार्ड चार सदस्यों तक सीमित होगा और वो किसी भी प्रकार की सरकारी सब्सिडी भी नहीं ले सकेगा। कानून के मौजूदा ड्राफ्ट के मुताबिक, ये विधेयक राजपत्र में प्रकाशन की तारीख से एक साल बाद लागू होगा।एक से ज्यादा विवाह के मामले में, बच्चों की संचयी संख्या की गणना के उद्देश्य से प्रत्येक जोड़े को एक विवाहित जोड़े के रूप में गिना जाएगा। ये कानून उन लोगों पर भी लागू नहीं होगा जो एक शादी से दो बच्चों के गर्भ धारण करने के बाद तीसरे बच्चे को गोद लेते हैं, या जिनके दो बच्चों में से एक विकलांग है और उनका तीसरा बच्चा है।यदि एक या दोनों बच्चों की मृत्यु हो जाती है, तो तीसरे बच्चे को गर्भ धारण करने वाले जोड़े को कानून का उल्लंघन नहीं माना जाएगा प्रस्तावित कानून कहता है, यदि राज्य सरकार के अधीन किसी सरकारी कर्मचारी की कोई भी कार्रवाई उसके द्वारा दिए गए वचन का उल्लंघन करती हुई पाई जाती है, तो उसे तत्काल प्रभाव से उसकी नौकरी से बर्खास्त कर दिया जाएगा। साथ ही भविष्य में किसी भी सरकारी नौकरी के लिए आवेदन करने से वंचित कर दिया जाएगा। इसके अलावा जिनके पास केवल एक बच्चा है और वो अपने मन से नसबंदी करवाते हैं तो उन्हें अतिरिक्त फायदा दिया जाएगा। इसके तहत उन्हें मुफ्त स्वास्थ्य देखभाल सुविधा और बीमा कवरेज मिलेगा, जब तक कि वो 20 साल का नहीं हो जाता। आईआईएम और एम्स सहित सभी शिक्षण संस्थानों में प्रवेश में एक बच्चे को वरीयता दी जाएगी। स्नातक स्तर तक निःशुल्क शिक्षा,बालिकाओं के मामले में उच्चतर शिक्षा के लिए छात्रवृत्ति और सरकारी नौकरियों में वरीयता दी जाएगी। मसौदा कानून में कहा गया है कि सिर्फ दो बच्चे करने वालों को प्रोत्साहन दी जाएगी। प्रोत्साहन किसी को भी दिया जाएगा जो खुद या जीवनसाथी पर स्वैच्छिक नसबंदी ऑपरेशन करवाकर दो-बच्चे के मानदंड को अपनाता है। इसमें मामूली ब्याज दरों पर घर बनाने या खरीदने के लिए सॉफ्ट लोन और पानी, बिजली और हाउस टैक्स जैसी उपयोगिताओं के लिए शुल्क में छूट शामिल होगी। दो बच्चे के मानदंड का पालन करने वाले सरकारी कर्मचारियों को अतिरिक्त रूप से पूरी सेवा के दौरान दो अतिरिक्त वेतन वृद्धि, पूरे वेतन और भत्ते के साथ 12 महीने का मातृत्व या पितृत्व अवकाश और मुफ्त स्वास्थ्य देखभाल सुविधा और जीवनसाथी को बीमा कवरेज मिलेगा।अतः उपरोक्त पूरे विवरण का अगर हम अध्ययन कर उसका विश्लेषण करें तो हमें यह महसूस होगा कि यूपी विधि आयोग के जनसंख्या नियंत्रण स्तरीकरण का कल्याण विधेयक 2021 का ड्राफ्ट मॉडल को संभवत सभी राज्यों को अपनाने पर विचार करने की जरूरत है और इस कानून को कल्याणकारी स्तरीकरण जनताका सकारात्मक जनभागीदारी अभियान चलाकर ही क्रियाओं क्रियान्वयन करना लाभकारी होगा।

 एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button

You cannot copy content of this page

situs nagatop

nagatop slot

kingbet188

slot gacor

SUKAWIN88