साहित्य दर्पण
स्त्री पुरुष का मन

स्त्री पुरुष का मन
सागर और आकाश का प्रतिबिंब
जिसका कोई छोर नहीं
अनगिनत तारों और
उल्का पिंडों का टूटना बिखरना
और खूबसूरत चांदनी रात।
एक दूसरे के मोहताज
कोमल हृदय सा बहता झरना
कभी मजबूत स्तंभ शिलालेख
हिमालय को चुनौती देता
आत्मविश्वास से भरा दंड संकल्प।
कमल राठौर साहिल
शिवपुर मध्य प्रदेश
9685907895



