आयुर्वेद डॉ प्रगति कुशवाहा कर रही मरीजों का एलोपैथिक इलाज:शिकायत होगी तभी कार्यवाही सम्भव:बीएमओ पाटन


जबलपुर दर्पण पाटन ब्यूरो/राजेंद्र सिंह की रिपोर्ट। डॉ प्रगति कुशवाहा एक आयुष (आयुर्वेद) की डॉक्टर है। जिनकी पोस्टिंग पाटन सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में अपने रसूख के दम पर हुई है पाटन में पिछले कई वर्षो से जैसा अंगद का पैर कोई हिला नही सका वैसे ही डॉ मैडम पाटन में 7-8 वर्षो से जमी है। इसकी वजह भी लाजमी है, डॉ साहिबा का सेटप इतना जबरजस्त है की पाटन हॉस्पिटल में पांच-पांच एमबीबीएस डॉ होने के बावजूद भी एक आयुष डॉ के कैबिन के आगे मरीजों की लंबी-लंबी कतारे आपको देखने को मिल जाएगी जबकि एमबीबीएस डॉ साब के पास इक्का दुक्का मरीज ही दिखाने आते है। आपको बताते चले कि डॉ मैडम सिर्फ आयुर्वेद का ही इलाज कर सकती है। और शासन से इनकी नियुक्ति भी इसी आधार पर की है। इनके पास आने वाले सभी मरीजों का इलाज डॉ मैडम एलोपैथिक मतलब अंग्रेजी दवाइयों के द्वारा कर रही है। इसकी इजाजत स्वास्थ्य विभाग इनको नहीं देता है। पैसे की लालच में आयुष डॉ प्रगति कुशवाहा ने डॉक्टरी पेशे को किया दागदार। डॉ मैडम द्वारा अनाप शनाप अंग्रेजी दवाइयां मरीजों को लिखती है। जबकि उनसे कम कीमत और अच्छी कंपनिओं की दवा बाजार में उपलब्ध हैं। हम आपको इसका कारण भी बताते है क्योंकि उक्त कंपनी की दवा लिखने पर डॉ मैडम को 40% कमीशन दवा कंपनियो के द्वारा दिया जाता है। इनकी दवा पाटन में सिर्फ अग्रवाल मेडिकल स्टोर पर ही मिलती है। इस दुकान की सेल मैडम के भरोसे ही चल रही है। इसके लिए डॉ मैडम द्वारा मरीजों को कोन सी दवा लिखी व कितने मरीजों को देखा है। इनके द्वारा रजिस्टर में मरीजों का नाम और दवा की जानकारी प्रतिदिन लिखी जाती है जिससे मेडिकल स्टोर से अपना कमीशन ले सके। पाटन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में सोनोग्राफी,एक्स-रे,पैथोलॉजी ये सभी सुविधाएं है इसके बावजूद कमीशन के चक्कर में सोनोग्राफी के लिए मरीजों को जैन सोनोग्राफी लैब रानीताल जबलपुर भिजवा दिया जाता है। जहा मरीजों से सोनोग्राफी के 1800 से 2000 रू चार्ज किया जाता है। प्रति सोनोग्राफी में लगभग 700 रू कमीशन डॉ मैडम का होता है। इनके द्वारा दिन भर में 8-10 मरीजों की सोनोग्राफी पर्ची बनाना मैडम के लिए आम बात है। पाटन तहसील में लगभग 76 ग्राम पंचायत है। और इतनी ही आशा कार्यकर्ता है जो गांवों से भोले भाले मरीजों को लाकर डॉ मैडम के चुंगल में फसा देती है। उसके लिए इन आशा कार्यकर्ता को भी कुछ दान दक्षिणा मिल जाती है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पाटन में डॉ प्रगति कुशवाहा के द्वारा अंग्रेजी दवाइयों से इलाज करते हुए कोई भी आकर देख सकता है। सिर्फ पाटन बीएमओ डॉ आदर्श बिश्नोई को नही दिखता है। यह सब कार्य इनके संरक्षण में ही फल फूल रहा है। जब तो उनसे इस विषय पर बात करो तो एक ही जवाब होता है। आप शिकायत दीजिए में कार्यवाही करूंगा। और यह सब नजारा तहसील मुख्यालय में बैठे जवाबदार अधिकारियों को भी नही दिखता,शायद ये भी शिकायत के इंतजार में बैठे है। जब शिकायत आएगी तभी इनके द्वारा कार्यवाही की जाएगी। या किसी निर्दोष मरीज की जान जाने पर ही प्रशासन की नींद खुलेगी जब यहा इलाज कराने वाले मरीजों से बात की गई तो बहुत सारे मरीजों ने नाम एव उनकी पहचान न बताने की शर्त पर कहा कि-हम जब काउंटर से पर्ची बनवाते है तब ही डॉ मैडम का कैबिन हमको बता दिया जाता था। इनके द्वारा अग्रवाल मेडिकल स्टोर से दवाई लाने का बोला जाता था अन्य मरीजों ने बताया कि इनके द्वारा सोनोग्राफी सरकारी अस्पताल में न कराकर मरीजों को जैन लैब रानीताल जबलपुर भेजा जाता हैं जहा पर हमसे 1800 सौ से 2000 रू वसूले जाते है। पंचायतों की बहुत सी आशा कार्यकर्ता डॉ मैडम के लिए काम करती है। एक अन्य मरीज ने बताया कि हमको नही पता आयुष डॉक्टर और एलोपैथिक डॉक्टर में क्या फर्क होता है हमको तो अपना इलाज कराना है सरकारी अस्पताल का कोई भी डॉक्टर कर दे। जब इस विषय पर डॉ अर्चना मरावी जिला आयुष अधिकारी से बात की गई तो उनके द्वारा बताया गया कि वे सिर्फ आयुर्वेद का इलाज कर सकती हैं एलोपैथिक का इलाज नहीं कर सकती है। यदि मेरे पास इनके विरुद्ध शिकायत आती है तो निश्चित ही कार्यवाही करूंगी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के बीएमओ डॉक्टर आदर्श बिश्नोई से बात की गई तो उनके द्वारा बताया गया कि आप एक लिखित शिकायत दीजिए में इनके विरुद्ध कार्यवाही करूंगा। अब सवाल उठता है क्या
स्वास्थ्य विभाग इनकी जांच करके इनके विरुद्ध कार्यवाही करेगा या फिर इनका पाटन से ट्रांसफर करके मौन धारण करेगा ?



