
ईट और कंक्रीट का शहर,
पाषाण ह्रदय,
पाषाण लोग ।
गली और चौराहों में,
बिखरे कांच के टुकड़े,
घायल होते सब ?
घायल होते लोग?
लहू की जगह पानी
भावशून्य पाषाण लोग?
ईट और कंक्रीट का शहर ,
पाषाण ह्रदय
पाषाण लोग ।
भागे जा रहे,
भागे जा रहे?
पकड़ में नहीं आ रहे?
रुकना नहीं ,
भागना है ।
भाग भाग कर जीना है ?
जिनके पीछे भाग रहे हैं
वो भी भाग रहा है?
ईट और कंक्रीट का शहर
पाषाण ह्रदय
पाषाण लोग
नित नई सभाओं में जाना,
भीड़ भाड़
मस्ती तराना?
अपने पन को तरसते लोग?
अकेले और अकेले लोग ।
ईट और कंक्रीट का शहर
पाषाण ह्रदय
पाषाण लोग
भव्य अट्टालिकाए
भीड़ भाड़ परिचारिकाए?
तन्हा मजबूर ,
परेशान लोग ?
ईट और कंक्रीट का शहर,
पाषाण ह्रदय
पाषाण लोग।
सुनीता कुमारी
पूर्णियाँ, बिहार



