संपादकीय/लेख/आलेखसाहित्य दर्पण

कोरोना काल में आई आर्थिक कमजोरी को बूस्टर डोज – वैश्विक व्यापार में भारत के हिस्से को बढ़ाने की कवायत

गोंदिया – कोरोना महामारी ने वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ-साथ भारतीय अर्थव्यवस्था को दी बुरी तरहसे अपने नकारात्मक शिकंजे में देखकर तहस-नहस करने की कोशिश की परंतु हम भी भारतीय भारत माता और अर्थव्यवस्था की सुरक्षा और गतिशील बनाने के लिए जांबाज़ी से रणनीतिक रोड मैप बनाने में तात्कालिक तीव्र गति से भिड़ गए हैं। हालांकि सरकार ने पिछले साल 2020 में 20 लाख़ करोड़ रुपए और जून 2021 में 6.29 लाख़ करोड़ रुपए का बूस्टर डोज अर्थव्यवस्था में दिया है। जिसमें एमएसएमई सहित अनेक क्षेत्रों में सकारात्मक असर देखने को मिला है। अब बारी है निर्यात क्षेत्र में मोर्चा संभालने की क्योंकि, विनिर्माण क्षेत्र और समग्र अर्थव्यवस्था पर व्यापक प्रभाव के साथ निर्यात में रोज़गार सृजनव की असीम संभावनाएं हैं। इसमें विशेष रूप से एमएसएमई और ज्यादा श्रम प्रधान वाले क्षेत्र शामिल हैं। अतः भारत के निर्यात और वैश्विक व्यापार में उसके हिस्से का लाभ उठाने तथा इसे विस्तार देने पर ध्यान केंद्रित करने की जरूरत है। निर्यात क्षमता का विस्तार करने और वैश्विक मांग को पूरा करने के लिए स्थानीय क्षमताओं के उपयोग की खातिर सभी हित धारकों को सक्रिय करना ज़रूरी है।…साथिया बात अगर हम निर्यात क्षमता का विस्तार करने और वैश्विक मांग को पूरा करने के लिए स्थानीय क्षमताओं का 100 प्रतिशत उपयोग करने के लिए सभी हित धारकों को सक्रिय करने के लिए माननीय पीएम ने दिनांक 6 अगस्त 2021 को टीवी चैनलों पर लाइव दिखाएं वर्चुअल संबोधन और पीआईबी की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार अपनी तरह की पहली पहल से विदेशों में भारतीय मिशनों के प्रमुखों और व्यापार वाणिज्य क्षेत्र के हितधारकों के साथ वर्चुअल बैठक की जिसमें करीब 20 से अधिक विभागों के सचिवों, वाणिज्य मंत्री,विदेश मंत्री सहित राज्य सरकारों के अधिकारियों, निर्यात संवर्धन परिषदो के सदस्यों इत्यादि के साथ बैठक कर निर्यात बढ़ाने के लिए बातचीत की और वैश्विक व्यापार में भारत के हिस्से को बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करने को कहा और स्थानीय से वैश्विक दुनिया के लिए भारत में स्थान बनाइए इसका आह्वान भी किया। उन्होंने एक्‍सपोर्ट को बढ़ाने के लिए 4 मंत्र,चार फैक्‍टर भी बताए – 1)देश में मैन्यूफैक्चरिंग कई गुना बढ़े 2)- ट्रांसपोर्ट की, लॉजिस्टिक्स की दिक्कतें दूर हों,3) एक्सपोर्टर्स के साथ सरकार कंधे से कंधा मिलाकर चले,4)फैक्टर,जो आज के इस आयोजन से जुड़ा है, वो है- भारतीय प्रॉडक्ट्स के लिए इंटरनेशनल मार्कट,एक्सपोर्ट बढ़ाने के लिए चार फैक्टर्स बहुत महत्वपूर्ण हैं।vपीएम ने कहा कि ये समय ब्रांड इंडिया के लिए नए लक्ष्यों के साथ नए सफर का है, हमें ये प्रयास करना है कि दुनिया के कोने-कोने में भारत के हाई वैल्‍यू एडेड प्रोडक्ट्स को लेकर एक स्वाभाविक डिमांड पैदा हो, आज फिजिकल, टेक्नोलॉजीकल और फाइनेंशियल कनेक्टिविटी की वजह से दुनिया हर रोज और छोटी होती जा रही है। ऐसे में हमारे एक्सपोर्ट के एक्सपेंशन के लिए दुनिया भर में नई संभावनाएं बन रही हैं।इस वक्त हमारा एक्सपोर्ट जीडीपी का लगभग 20 प्रतिशत है। हमारी अर्थव्यवस्था के साइज,हमारे पोटेंशियल, मैन्युफेक्चरिंग और सर्विस इंडस्ट्री के बेस को देखते हुए इसमें बहुत वृद्धि की संभावना है। आगे कहा कि प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव स्कीम से मैन्युफेक्चरिंग की स्केल ही नहीं बल्कि ग्लोबल क्वालिटी और एफिशिएंसी का स्तर बढ़ाने में भी मदद मिलेगी। इससे आत्मनिर्भर भारत का,मेड इन इंडिया का नया इकोसिस्टम विकसित होगा। देश को मैन्युफेक्चरिंग और एक्सपोर्ट के नए ग्लोबल चैंपियन्स मिलेंगे, ये समय ब्रांड इंडिया के लिए नए लक्ष्यों के साथ नए सफर का है। ये समय हमारे लिए क्वालिटी और रिलायब्लिटी की नई पहचान स्थापित करने का है। हमें ये प्रयास करना है कि दुनिया के कोने-कोने में भारत के हाई वैल्यू-एडेड प्रोडक्ट को लेकर एक स्वाभाविक डिमांड पैदा हो। विदेशों में मौजूद इंडियन हाउस,भारत का प्रतिनिधित्‍व करें।ये समय आजादी के अमृत महोत्सव का है. ये समय आजादी के 75वें वर्ष में अपनी स्वतंत्रता को सेलिब्रेट करने का तो है ही, साथ ही भविष्य के भारत के लिए एक क्लियर विजन और रोडमैप के निर्माण का अवसर भी है। उन्‍होंने कहा क‍ि अलग-अलग देशों में मौजूद इंडिया हाउस, भारत की मैन्यूफैक्चरिंग पावर के भी प्रतिनिधि बनें। समय-समय पर आप, भारत में यहां की व्यवस्थाओं को अलर्ट करते रहेंगे, गाइड करते रहेंगे, तो इसका लाभ एक्सपोर्ट को बढ़ाने में होगा। उन्होंने एक सबसे महत्वपूर्ण बात कही कि प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव स्कीम से हमारी मैन्युफैक्चरिंग की स्केल ही नहीं बल्कि ग्लोबल क्वालिटी और ईफिशिएंसी का स्तर बढ़ाने में भी मदद मिलेगी। इससे आत्मनिर्भर भारत का, मेड इन इंडिया का नया इको सिस्टम विकसित होगा। देश को मैन्युफैक्चरिंग और निर्यात के नए वैश्विक चैंपियंस मिलेंगे। आगे कहा कि हालही में सरकार ने निर्यात कों को लेकर एक बड़ा फैसला लिया है। इस फैसले से हमारे निर्यातकों को बीमा कवर के रूप में लगभग 88 हज़ार करोड़ रुपए का बूस्ट मिलेगा। इसी प्रकार निर्यात इंसेंटिव को रेशनलाइज करने से, डब्ल्यूटीओ कंप्लायेंट बनाने से भी हमारे एक्सपोर्ट को बल मिलेगा। उन्होंने कहा कि दुनिया के अलग-अलग देशों में बिजनेस करने वाले हमारे एक्सपोर्टर्स बहुत बेहतर तरीके से जानते हैं कि स्टेबिलिटी का कितना बड़ा प्रभाव होता है। भारत ने रेट्रोस्पेक्टिव टैक्सेशन से मुक्ति का जो फैसला लिया है, वो हमारा कमिटमेंट दिखाता है, पॉलीसीज में कंसिस्टेंसी दिखाता है। साथियों बात अगर हम बातचीत के मकसद की करें तो बातचीत का मकसद, निर्यात क्षमता का विस्‍तार करना,इस संबोधन का उद्देश्य वैश्विक व्यापार में भारत के निर्यात के हिस्से को बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करना है। बातचीत का मकसद देश की निर्यात क्षमता का विस्तार करने और वैश्विक मांग को पूरा करने के लिए स्थानीय क्षमताओं का उपयोग करने के लिए सभी संबंधित पक्षों को प्रोत्साहित करना है। अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर उसका विश्लेषण करेंगे तो हम पाएंगे कि कोरोना काल में आई आर्थिक कमजोरी को बूस्टर डोज देने की कोशिश की गई है। वैश्विक व्यापार में भारत के हिस्से को बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया गया है। स्थानीय से वैश्विक दुनिया के लिए भारत में स्थान बनाइए पीएम का यह आह्वान काफी सराहनीय है।

-संकलनकर्ता- कर विशेषज्ञ एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र

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