साहित्य दर्पण
इश्क़ का फलसफ़ा

जीवन प्यार का गीत
राग सुख दुख का लिए
जिसे हँसते हँसते गाना है
इक पल जो हाथ से छूट गया
यादों के गुलदस्ते से सजा है !
तमन्ना थी नातों की उलझन को
संवार कर खुलकर जीने की
लेकिन जीवन की ढलती संध्या में
शमा की मोम की तरह
खुद को पिघला पाया !
इस पल के बाद अब
चेहरों के विभिन्न किरदारों में
पहचान खुद की ही करनी है
वफ़ा ए इश्क़ का फलसफ़ा
भी नया अब सीखना है !
जब तक है सांस
रहेगा कायम उम्मीद का दिया
सितम लाख चाहे दुनिया के हो
होगी कम ना कभी रिश्तों की चाहत
इश्क़ ज़िन्दगी से करना है बेहिसाब !
: मुनीष भाटिया
585, स्वस्तिक विहार, पटियाला रोड,
जीरकपुर (मोहाली), चंडीगढ़
9416457695



