संपादकीय/लेख/आलेखसाहित्य दर्पण

बुजुर्गों के लिए जीवन का गुणवत्ता सूचकांक रिपोर्ट जारी – स्वास्थ्य प्रणाली स्तंभ, अखिल भारतीय स्तर पर उच्चतम परंतु शिक्षा प्राप्ति और रोज़गार स्तंभ बहुत कमजोर

गोंदिया ।  भारत विश्व में सबसे युवा शक्ति प्रदान देश है। जहां उम्र वर्ग की श्रेणी में युवा सबसे अधिक हैं। इसका अभिप्राय भारत कार्यबल मैं पूर्णतःसशक्त है। जरूरत है बस उन्हें दिशा प्रदान करने की जो तीव्रता से शुरू है। क्योंकि भारत को आत्मनिर्भर भारत बनाने की ओर तेज़ी से रणनीतिक रोडमैप बनाना और क्रियान्वयन करना तेज़ी से शुरू है। जिससे युवा कार्यबल का उपयोग पूर्णक्षमतासे सकारात्मक दिशा देकर किया जा रहा है और वह दिन दूर नहीं है जब भारत पूर्ण रूप से आत्मनिर्भर भारत कहलाएगा…। साथियों इस प्रक्रिया में बहुत ज्यादा ज़रूरी हमारे अनुभवी बड़ों बुजुर्ग साथियों के मार्गदर्शन,संरक्षण और छत्रछाया, अनुभव की जरूरत है, जो युवा पीढ़ी को एक दिशा देने का काम करेंगे। हमारे संस्कार तो भारत माता की मिट्टी में ही समाए हैं कि, हम अपने बड़े बुजुर्गों का कितना सम्मान करते हैं, मात्र कुछ अपवादों को छोड़ देंतोअधिकतम नागरिक मेरी इस बात से सहमत होंगे। भारत में बुजुर्गोंके प्रति भावपूर्ण सम्मान एक ईश्वर अल्लाह रूपी भाव के रूप में है। यहां हर कार्य में बुजुर्गों का स्वर्णिम स्थान वर्तमान पीढ़ी की छत्रछाया, नेतृत्व, मार्गदर्शक और संरक्षण के रूप में हो रहा है और हमेशा रहेगा। भारत में पीएम की आर्थिक सलाहकार परिषद (ईएसी) के अनुरोध पर इंस्टीट्यूट फॉर कॉम्पिटिटिवनेस द्वारा बुजुर्गों के लिए जीवन की गुणवत्ता सूचकांक की रिपोर्ट तैयार की गई है जो उन मुद्दों पर आधारित है, जिनका अक्सर बुजुर्गों के सामने आने वाली समस्याओं में उल्लेख नहीं किया जाता है…। साथियों बात अगर हम इस रिपोर्ट की करें तो यह रिपोर्ट दिनांक 11अगस्त 2021 शाम को जारी की गई। पीआईबी की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, बुजुर्गों के लिये जीवन गुणवत्ता सूचकांक’ शीर्षक से जारी रिपोर्ट को इंस्टीट्यूट फॉर कॉम्पिटिटिवनेस ने तैयार किया है। इस रिपोर्ट में राज्यों को दो श्रेणियों बुजुर्ग (जहां वरिष्ठ नागरिकों की आबादी 50 लाख से अधिक है) और अपेक्षाकृत बुजुर्ग (जहां बुजुर्गों की आबादी 50 लाख से कम है) में बांटा गया है। यह रिपोर्ट भारतीय राज्यों में उम्र बढ़ने के क्षेत्रीय पैटर्न की पहचान करने के साथ-साथ देश में उम्र बढ़ने की समग्र स्थिति का भी आकलन करती है। यह रिपोर्ट इसबात काभी गहराईसे आकलन करती है कि भारत अपनी बुजुर्ग आबादी के कल्याण के लिए किस प्रकार अच्छा काम कर रहा है। यह सूचकांक भारत में बुजुर्ग आबादी की जरूरतों और अवसरों को समझने के तौर तरीकों को विस्तृत बनाता है। यह पेंशन की पर्याप्तता और आय के अन्य स्रोतों के लिए बहुत आगे जाकर काम करता है, जो हालांकि महत्वपूर्ण हैं लेकिन अक्सर इस आयु समूह की जरूरतों के बारे में नीतिगत सोच और बहस को संकुचित करते हैं। यह सूचकांक इस बारे में भी प्रकाश डालता है कि मौजूदा और भविष्य की बुजुर्ग आबादी के जीवन को बेहतर बनाने का सबसे अच्छा तरीका यही है कि आज की युवा आबादी के लिए स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार में निवेश किया जाए।इस सूचकांक के ढांचे में चार स्तंभ – वित्तीय कल्याण, सामाजिक कल्याण,स्वास्थ्य प्रणाली और आय सुरक्षा तथा आठ उप-स्तंभ – आर्थिक सशक्तिकरण, शैक्षिक अर्जन और रोजगार, सामाजिक स्थिति, शारीरिक सुरक्षा, बुनियादी स्वास्थ्य, मनोवैज्ञानिक कल्याण, सामाजिक सुरक्षा और पर्यावरण के अनुरूप बनाना शामिल हैं। इस रिपोर्ट की मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं (1) स्वास्थ्य प्रणाली स्तंभ का अखिल भारतीय स्तर पर उच्चतम राष्ट्रीय औसत 66.97 होने तथा समाज कल्याण में यह औसत 62.34 होने का पता चला है। वित्तीय कल्याण में यह स्कोर 44.7 रहा है, जो शिक्षा प्राप्ति और रोजगार स्तंभ में 21 राज्यों के कमजोर प्रदर्शन के कारण कम रहा है और यह सुधार की संभावना को दर्शाता है। (2)राज्यों ने विशेष रूप से आय सुरक्षा स्तंभ में बहुत खराब प्रदर्शन किया है, क्योंकि आधे से अधिक राज्यों में आय सुरक्षा में राष्ट्रीय औसत यानी 33.03 से भी कम प्रदर्शन किया है, जो सभी स्तंभों में सबसे कम है। ये स्तंभ-वार विश्लेषण राज्यों को बुजुर्ग आबादी की स्थिति का आकलन करने और उनकी प्रगति में बाधा डालने वाले मौजूदा अंतरालों की पहचान करने में मदद कर सकते हैं। (3) राजस्थान और हिमाचल प्रदेश क्रमशः बुजुर्ग और अपेक्षाकृत बुजुर्ग आबादी वाले राज्यों में सर्वाधिक स्कोर हासिल करने वाले क्षेत्र हैं। जबकि चंडीगढ़ और मिजोरम केंद्र शासित प्रदेश और पूर्वोत्तर क्षेत्र के राज्य श्रेणी में सर्वाधिक स्कोर हासिल करने वाले क्षेत्र हैं। बुजुर्ग आबादी वाले राज्य ऐसे राज्य हैं, जहां बुजुर्ग आबादी 5 मिलियन से अधिक है, जबकि अपेक्षाकृत बुजुर्ग आबादी वाले राज्य ऐसे राज्य हैं जहां बुजुर्ग आबादी 5 मिलियन से कम है। आईएफसी के ने कहा कि किसी नैदानिक ​उपकरण के बिना अपनी बुजुर्ग आबादी की जटिलताओं को समझना और उनके लिए योजना बनाना नीति निर्माताओं के लिए भी चुनौती बन सकता है। बुजुर्गों के लिए जीवन की गुणवत्ता सूचकांक भारत में बुजुर्ग आबादी की जरूरतों और अवसरों को समझने के तौर – तरीकों को व्यापक बनाने के लिए जारी किया गया है। यह सूचकांक बुजुर्ग लोगोंके आर्थिक,स्वास्थ्य और सामाजिक कल्याण के मुख्य क्षेत्रों का मापन करने के साथसाथ देश में बुजुर्ग लोगों की गहन स्थिति के बारे में भी जानकारी प्रदान करता है। इस प्रकार यह सूचकांक देश के लिए उन क्षेत्रों की पहचान करने में मदद कर सकता है जिनमें सुधार करने की आवश्यकता है। इसके अलावा यह सूचकांक उचित रैंकिंग के माध्यम से राज्यों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने के साथ-साथ उन स्तंभों और संकेतकों पर भी प्रकाश डालता है, जिनमें वे सुधार कर सकते हैं। इस सूचकांक को एक उपकरण के रूप में उपयोग करते हुए राज्य सरकारें और हितधारक उन क्षेत्रों की पहचान करते हैं, जिनके बारे में काम करने की जरूरत है, ताकि अपनी बुजुर्ग पीढ़ी को एक आरामदायक जीवन उपलब्ध कराया जा सके।अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर उसका विश्लेषण करेंगे तो हम पाएंगे कि बुजुर्गों के लिए जीवन का गुणवत्ता रिपोर्ट जारी किया गया है उसमें, स्वास्थ्य प्रणाली स्तंभ अखिलभारतीय स्तर पर उच्चतम है, परंतु शिक्षाप्राप्त किया रोजगार स्तंभ अत्यंत कमजोर कमजोर है जो चिंता का विषय बना हुआ है, क्योंकि भारत में बुजुर्गों का स्वर्णिम स्थान है। यही कारण है कि हमारे बुजुर्ग ही वर्तमान पीढ़ी की छत्रछाया नेतृत्व, मार्गदर्शक, संरक्षक के रूप में हैं। क्योंकि भारतीयों में बुजुर्गों के प्रति ईश्वर अल्लाह रूपी भाव विराजमान है।

-संकलनकर्ता- कर विशेषज्ञ एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र

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