कटनी दर्पण

शासकीय महाविद्यालय बरही मे मनाया गया मानव अधिकार एवं अंतर्राष्ट्रीय पशु अधिकार दिवस

जबलपुर दर्पण। कटनी – शासकीय महाविद्यालय बरही मे राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई एवं इको क्लब द्वारा प्राचार्य डॉ. आर. के. त्रिपाठी के मार्गदर्शन, प्रभारी प्राचार्य डॉ. एस.एस. धुर्वे के निर्देशन एवं प्रभारी कार्यक्रम अधिकारी डॉ. अरविंद सिंह के नेतृत्व में मानव अधिकार एवं अंतर्राष्ट्रीय पशु अधिकार दिवस मनाया गया। कार्यक्रम में डॉ. अरविंद सिंह ने बताया कि दुनिया भर में प्रतिवर्ष 10 दिसंबर को मानव अधिकार एवं अंतर्राष्ट्रीय पशु अधिकार दिवस मनाया जाता है। मानवाधिकार दिवस मनाने का मुख्य उद्देश्य दुनिया भर में होने वाले भेदभाव, हिंसा, अत्याचार और मानवता के खिलाफ होने वाले अपराधों के प्रति लोगों को जागरूक करना एवं उन्हें अपने अधिकारों के लिए लड़ने के लिए प्रेरित करना है। मानवाधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा इस बात पर प्रकाश डालता है कि हर व्यक्ति को बुनियादी स्वतंत्रता और सुरक्षा हासिल है, चाहे उसकी जाति, लिंग, धर्म, राष्ट्रीयता कुछ भी क्यों न हो। मानवाधिकार दिवस 2025 की थीम “मानव अधिकार, दैनिक आवश्यकताएं” है। जो इस बात पर जोर देता है कि हमारे रोजमर्रा के जीवन में मानवाधिकार किस तरह से प्रभाव डालते हैं एवं सेवाओं की उपलब्धता किसी व्यक्ति के जीवन की गुणवत्ता को कैसे प्रभावित करतीं है। 2025 की थीम इस बात पर जोर देती है कि मानवाधिकार केवल सिद्धांत या दस्तावेज़ों तक सीमित न रहें बल्कि उनका प्रभाव धरातल या कार्यस्थलों में भी दिखाना चाहियें। साथ ही कहां कि जिस तरह मनुष्य को स्वतंत्रता, सम्मान और न्याय के साथ जीने का अधिकार है उसी प्रकार पशुओं को भी पीड़ा रहित जीवन जीने का अधिकार है। हम मानव अधिकारों को लेकर तो जागरूक हैं लेकिन नैतिकता और करुणा के आधार पर मानवाधिकार और पशु अधिकार के बीच की समानता से आज तक अनजान बने हुए हैं। हम हर बार यह समझने में चूक कर देते हैं कि दोनों ही दिवस सह-अस्तित्व और शांति की आवश्यकता पर जोर देते हैं जो हमें यह बताते हैं कि जीवों के अधिकारों की रक्षा, हम इंसानों के अधिकारों की सुरक्षा से ही जुड़ी है। लेकिन हम अक्सर अपने मनोरंजन के लिए पशुओं का शोषण, पालतू पशुओं के साथ दुर्व्यवहार, और उनकी देखभाल की उपेक्षा करके, उनके अधिकारों को अनदेखा कर जाते हैं। प्रभारी प्राचार्य डॉ. एस. एस. धुर्वे ने कहा कि इसी दिन 1948 में संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा मानव अधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा की गई थी, जो मानव अधिकारों के लिए एक आधारशिला है जिसमें सभी को समान अधिकार और गरिमा प्रदान करने की बात कहीं गई है। हमें यह भी पता होना चाहिए कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद 51 ए (जी) हम पर जीवों की रक्षा करने और सभी जीवित प्राणियों के प्रति दया रखने की मौलिक जिम्मेदारी निभाने पर जोर देता है। जिसके अनुसार जानवरों को भी दया के साथ व्यवहार मिलने एवं जीने का समान अधिकार है। जिसकी अनदेखी करने पर दंड का भी प्रावधान है। डॉ. मंजुलता साहू ने कहा कि हमें यह भी याद रखना चाहिए कि पशु-पक्षियों के भीतर भी प्रेम भाव होता है और मनुष्यों के साथ उनका जुड़ाव भी प्रेम के आधार पर ही होता है। भले ही उनके पास जुबान नहीं होती लेकिन वह प्रेम की भाषा बखूबी समझते हैं, उनके प्रति दयाभाव हमें न केवल एक सरल इंसान बनाती है बल्कि एक बेहतर व्यक्तित्व निखार की ओर भी अग्रसर करती है। वहीं डॉ. के. के. विश्वकर्मा ने कहां कि मानवाधिकार दिवस मनाना केवल एक औपचारिकता नहीं है, बल्कि यह प्रत्येक व्यक्ति के लिए न्याय, सम्मान और समान अवसर सुनिश्चित करने की एक वैश्विक प्रतिबद्धता है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि दुनिया के कई हिस्सों में आज भी लाखों लोग गरीबी, भेदभाव, युद्ध और तानाशाही के कारण अपने मौलिक अधिकारों से वंचित हैं। हमें संविधान में प्राप्त हमारे अधिकारों की तो जानकारी है लेकिन बेजुबानों को मिले अधिकारों की जानकारी नहीं है। डॉ. सुनीता सिंह ने कहां कि जिस तरह मनुष्य को स्वतंत्रता, सम्मान और न्याय पाने का अधिकार है उसी प्रकार पशुओं को भी पीड़ा रहित जीवन जीने का अधिकार है। अंत में उपस्थित सभी स्टाफ के सदस्यों एवं विद्यार्थियों ने संकल्प लिया कि हम केवल मानवाधिकारों की रक्षा की बात नहीं करेंगे बल्कि उन बेजुबानों के जीवन की भी रक्षा सुनिश्चित करेंगे एवं महात्मा गांधी के इस कथन को भी याद किया कि किसी राष्ट्र की महानता और उसकी नैतिक प्रगति इस बात से आंकी जा सकती है कि वह अपने पशुओं के साथ कैसा व्यवहार करता है। कार्यक्रम का संचालन डॉ. रश्मि त्रिपाठी एवं आभार प्रदर्शन प्रियंका तोमर द्वारा किया गया। कार्यक्रम में प्रभारी प्राचार्य डॉ. एस. एस. धुर्वे, प्रभारी डॉ. अरविन्द सिंह, डॉ. राकेश दुबे, डॉ नीलम चतुर्वेदी, श्री मनीष मिश्रा, डॉ. रूपा शर्मा, डॉ. अरविन्द शुक्ला, सौरभ तिवारी, अनीता सिंह, पवन दुबे, कैश अंसारी, डॉ. कृष्णपाल सिंह, सौरभ सिंह, पुष्पलता विश्वकर्मा, रावेंद्र साकेत, सोनम पाण्डे, संतोषी तिवारी, दीपक मिश्रा, डॉ. अरुण तिवारी, डॉ. चंद्रभान विश्वकर्मा, शंकर सिंह, अजय सेन, गणेश प्रजापति, राजेश्वरी मिश्रा तथा स्टॉफ के अन्य सदस्य, रासेयो स्वयंसेवको एवं विद्यार्थियों की उपस्थिति रही।

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