लो जिदंगी का एक साल कम हो चला…

कुछ पुरानी यादें पीछे छोड़ चला।।
कुछ ख्वाहिशें दिल में रह जाएंगी।
कुछ बिन मांगे पूरी हो जाएंगी।।
कुछ छोड़ कर चले गए।
कुछ नए रिश्ते जुड़ जाएंगे।।
कुछ मझसे खफा हुए।
कुछ मिलकर मुस्कराएगें।।
कुछ मुझसे मिल के भूल गए।
कुछ कभी भूल ना पाएंगे।।
कुछ कुवारे व्याह जाएंगे।
कुछ तैयारी में जुट जाएंगे।।
कुछ सुंदर सपने सजाएंगे।
कुछ उलझनों में फंस जाएंगे।।
कुछ तुमसे मिलने आएंगे।
कुछ हमसे मिलने आएंगे।।
कुछ पुराने साल को विदाई देंगे।
कुछ नए साल को बधाई देंगे।।
कुछ दोस्तों संग मौज करेंगे।
कुछ परिवार संग यादगार मनाएंगे।।
कुछ गलतियां 2021 में की।
2022 में ना दोहराएंगे।।
कुछ पुराना साल बीता रहा।
कुछ नया साल मनाएंगे।।
कुछ शायद अंजान है।
कुछ बहुत परेशान है।
कुछ को मेरा इंतजार है।
कुछ का मुझे इंतजार है।।
कुछ सहीं कुछ गलत भी है।
कुछ गलती माफ कीजिऐ।
कुछ अच्छा लगे तो याद कीजिए।।
कवि-रोशनी विश्वकर्मा।




