नाबालिग बच्चे थामें दिख रहे कटोरा, रोक लगाने नहीं हो रही पहल

जिले में भिक्षावृत्ति किसी संगठित उद्योग की तरह रही है पनप
डिंडोरी,जबलपुर दर्पण ब्यूरो। जिले भर में लम्बे समय से भिक्षावृत्ति की परम्परा किसी संगठित उद्योग की तरह पनप रहा है। जहां नाबालिक बच्चे हाथों में कटोरा रखकर इधर उधर भीख मांगते नजर आ रहे हैं। गौरतलब है कि लंबे समय बाद भी परंपरा को तोड़ना या भिक्षावृत्ति में कमी लाने न तो शासन प्रशासन द्वारा कोई ध्यान दिया गया और न ही किसी सामाजिक संगठनों के द्वारा भिक्षावृत्ति में रोक लगाने कोई कमी लाई गई। ऐसा ही मामला जिले के जनपद मुख्यालय समनापुर में भिक्षावृति पर रोक लगे इसे लेकर कभी कोई सख्ती नहीं की जा रही। बताया गया कि भिक्षावृति रोकने का अभियान मुख्यालय के अंदर प्रशासन की अनदेखी के कारण कारगार नहीं हो पा रहा हैं। जनपद मुख्यालय के अंदर बच्चों से भीख मंगाने वालों के हौसलें ठोस कार्यवाही के बाद ही पस्त होंगे। देखें जा रहे हैं कि क्षेत्र में कुछ देर के लिए खड़े हो जाइए तो भिक्षावृति करने वाले बच्चे व बड़े आपको घेर लेंगे, वे पहले आपसे मनुहार करेंगे फिर नाराज होने पर आपको दो बाते भी सुना जाएंगे। भिक्षावृति करने वालों के कारण राहगीरों सहित होटल संचालक भी परेशान हैं।भिक्षावृति मुख्यालय के अंदर पेशा का रूप ले चुकी है, भिक्षावृति से जुड़े लोगों का एक तरह से कब्जा हो चुका है। समनापुर के ददरी टोला के अधिकतर रहवासी प्रधानमन्त्री आवास एवं अन्य योजनाओं लाभ लेते हुए भिक्षावृत्ती को रोजगार बना बैठे हैं, बच्चे से लेकर बूढ़ों तक का केवल यही काम बना हुआ है। एक तरफ भिक्षा मांगने पर कानूनन रोक है, इसे गैर कानूनी घोषित किया है। खासकर जिन हाथों में किताब होनी चाहिए, उन हाथों में भीख का कटोरा देने वालों पर सख्त कार्रवाई का प्रावधान है। लेकिन इन सब पर नजर डाले तो सिर्फ यह कोरी घोषणाएं है। सरकार सात साल से लेकर 14 वर्ष तक के वंचित बच्चों के लिए भी शिक्षा का अधिकार कानून बनाकर लाई है, लेकिन मुख्यालय के अंदर बड़ी संख्या में बच्चे भी भीख मांग रहे हैं। सरकार झुग्गी-झोपड़ी युक्त क्षेत्रों में स्कूल चला रही है, जिसका महत्वपूर्ण उद्देश्य बच्चों को शिक्षा देना और उन्हें बाल मजदूरी सहित भिक्षावृति से रोकना है। शिक्षा के साथ बच्चों को भोजन, किताब, कॉपी सहित अन्य सुविधा का लाभ भी दिया जाता है, लेकिन तमाम सरकारी व्यवस्थाओं के बावजूद न तो बाल मजदूरी रुक रही है और न ही भिक्षावृत्ति पर कोई लगाम लग रही है।
भिक्षावृत्ति करना दंडनीय अपराध, आंकड़ों में मध्यप्रदेश पांचवें स्थान पर
मध्य प्रदेश में भिक्षावृत्ति निवारण अधिनियम 1973 के तहत भीख मांगना दंडनीय अपराध है। इतना ही नहीं इस कानून के तहत भिखारियों के पुनर्वास और ट्रेनिंग देकर सामान्य जीवन में लौटने के उपाय करने का भी प्रावधान है। लेकिन अफसोस है कि इस कानून के प्रावधान लागू ही नहीं किए गए, इस कारण भिखारियों पर पुलिस कोई सख्त कार्रवाई नहीं करती है। फिलहाल जिले में भिक्षावृत्ति करने वाले आकड़ों की संख्या जिले में किसी भी विभाग के पास उपलब्ध नहीं है। तमाम योजनाओं के बाद भी भिखारियों के मामले में मध्यप्रदेश देश में 5वें स्थान पर है। राज्य में भिक्षावृत्ति समाप्त हो इस धंधे में लगे लोगों का पुनर्वास कर उन्हेंं समाज की मुख्य धारा से जोड़ने के लिए कई कार्यक्रम चलाए गए, लेकिन स्थिति में अधिक सुधार नजर नहीं आया। भिक्षावृत्ति करने की ऐसी स्थिति तब है, जब मध्यप्रदेश में भिक्षावृत्ति निवारण अधिनियम कानून लागू है, इसके तहत भीख मांगना एक दण्डनीय अपराध है। बताया गया कि भिखारियों के मामलों में मध्यप्रदेश की स्थिति चिंताजनक है, जहां आंकड़ों में देश का मध्यप्रदेश पांचवे स्थान पर है। यह स्थिति तब है जब मध्यप्रदेश में गरीबों के लिए तमाम योजनाएं चलाई जा रही हैं, इसमें मुफ्त भोजन के साथ अन्य सुविधाएं भी फ्री हैं। बावजूद भिक्षावृत्ति पर रोक लगाने या कमी लाने कोई ठोस पहल नहीं हो रही।



