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कोरोनाः बिमारी एक दवा अनेक

रंजना मिश्रा ©️
कानपुर, उत्तर प्रदेश

इस समय पूरी दुनिया में पांच तरह की वैक्सीन पर काम चल रहा है। जिनमें पहली है जेनेटिक वैक्सीन, ऐसी वैक्सीन के तहत कोरोना वायरस के जीन्स का प्रयोग करके शरीर में प्रतिरोधक क्षमता विकसित की जाती है। दूसरे प्रकार की वैक्सीन को वायरल वेक्टर वैक्सीन कहते हैं, इसके तहत कोरोना वायरस के जीन्स को शरीर की कोशिकाओं में पहुंचाया जाता है और शरीर की प्रतिरोधक क्षमता की सक्रियता देखी जाती है। तीसरे प्रकार की वैक्सीन प्रोटीन बेस्ड वैक्सीन कहलाती है, इसके तहत वायरस के खिलाफ शरीर की इम्युनिटी को सक्रिय करने के लिए कोविड-19 वायरस के प्रोटीन का इस्तेमाल किया जाता है। चौथी प्रकार की वैक्सीन को होल वायरस वैक्सीन कहते हैं, इसके तहत एक कमजोर या सक्रिय कोरोना वायरस को शरीर में पहुंचाया जाता है और शरीर इसे पहचान कर इसके खिलाफ काम करना शुरू करता है। पांचवी प्रकार की वैक्सीन है रिपरपज़्ड वैक्सीन,ये वो वैक्सीन होती है जिसका प्रयोग पहले से किसी और बीमारी के लिए किया जाता रहा है और अब यह कोविड-19 के खिलाफ भी कारगर साबित हो सकती है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन का मानना है कि इस साल के अंत तक एक या दो वैक्सीन उपलब्ध हो सकती हैं। अमेरिका की मॉडर्ना नामक कंपनी mRNA 1273 नाम की वैक्सीन बना रही है। यह एक RNA वैक्सीन है जो शरीर में जाकर कोशिकाओं को किसी विशेष प्रकार के संक्रमण से लड़ने के लिए एंटीजन बनाने का संदेश देती है। जब एक बार शरीर यह एंटीजन बना लेता है तो इम्यून सिस्टम को यह याद रहता है कि जब असली वायरस हमला करता है तो शरीर की प्रतिरोधक प्रणाली उसका मुकाबला करती है। जल्द ही 30000 से ज्यादा लोगों पर इसकी परीक्षण की तैयारी है।
दूसरे नंबर पर ब्रिटेन की ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और ब्रिटिश फार्मा कंपनी एस्ट्राजेनेका द्वारा बनाई जा रही वैक्सीन है।इस वैक्सीन का भी इंसानों पर परीक्षण शुरू हो चुका है और उम्मीद है कि इस साल के आखिरी तक यह उपलब्ध हो जाएगी। इसका शुरुआती ट्रायल लगभग 1000 से ज्यादा लोगों पर किया गया और जिन लोगों को ये वैक्सीन दी गई, उनके शरीर में एंटीबॉडीज और वायरस को मारने वाले टी सेल्स बनने लगे। इसके अलावा रसिया ने भी एक वैक्सीन बनाई है।रसिया के वैज्ञानिकों का दावा है कि इस वैक्सीन की एक डोज शरीर को दो वर्षों तक कोरोना वायरस से बचा सकती है। इसके अलावा चीन भी वैक्सीन बनाने का दावा कर चुका है।
भारत में करीब 7 बड़ी कंपनियां वैक्सीन बनाने में जुटी हैं। जिनमें प्रमुख है भारत बायोटेक और आईसीएमआर द्वारा बनाई जा रही वैक्सीन, जिसका नाम है कोवैक्सीन। देश के 12 अलग-अलग अस्पतालों में इस वैक्सीन का परीक्षण किया जाएगा और इसमें 100 वालंटियर हिस्सा ले रहे हैं। भारत की दूसरी वैक्सीन है जॉयकोव-डी, जिसे जायडस कैडिला नामक एक भारतीय फार्मा कंपनी बना रही है। विश्व के बड़े-बड़े देश इस वैक्सीन वॉर को जीतना चाहते हैं और भारत भी इसमें प्रमुख भूमिका निभाना चाहता है।

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