मां की ममता पाने अवतरित होते है भगवान : स्वामी अशोकानंद

जबलपुर दर्पण। समान रूप से प्यार दुलार करती है, मातृत्व भाव का पूर्ण सुख बालपन से लेने स्वयं श्रीहरि नारायण कौशल्या के राम, यशोदा के श्रीकृष्ण के रूप मे अवतरित होते है। जब जब धरती माता आतातियो से त्रस्त होकर भगवान से करूणार्द्र पुकारती है तो भगवान का अवतरित होकर पुनः सनातन परापंराओ को पुनर्स्थापित करते है। श्रीकृष्ण के मात्र नाम संकीर्तन से सभी भौतिक और मानसिक पाप नष्ट हो जाते है चहुंओर सुखमय वातावरण निर्मित होता है। संकल्प से सिध्दि तक पूर्ण मनोयोग से किये प्रयास ही सफलता दिलाती है। उक्त भावुकतापूर्ण उदगार नर्मदा तट भक्तिधाम ग्वारीघाट जबलपुर मे श्रीहरि नारायण के अवतारो के परम पुनीत वैशाख मास के अवसर पर प्रख्यात कथावाचक परम पूज्य स्वामी अशोकानंद महाराज ने श्रीमुख से कहे।
कथा के चतुर्थ दिवस श्रीमद्भागवत महापुराण महोत्सव मे प्रदोष पूजन हुआ।
वैशाख मास शुक्ल पक्ष मे भगवान श्रीहरि नारायण के वांग्मय स्वरूप श्रीमद्भागवत महापुराण , श्रीविष्णु सहस्त्रनाम का पाठ और श्रवण का विशेष पुण्य कारी महत्व है ।
इस अवसर पर परम पूज्य स्वामी विश्वक सेनाचार्य महाराज, कैलाश गुप्ता, जगत बहादुर सिंह, डा जितेंद्र जामदार, जमा खान, पं प्रदीप महाराज, दिलीप तलरेजा, विजय पंजवानी, नरेंद्र केशवानी,
करिश्मा शर्मा, जया लालवानी, दीप्ति केशवानी, काजल, विमला, वीनू ममता, पं वेदांत शर्मा, जगदीश दीवान, पप्पू लालवानी, प्रिंस, उमेश पारवानी, आनंद, सहित भक्तिधाम ग्वारीघाट भक्त मंडल , संस्कारधानी जबलपुर के भाविक श्रृध्दालुओ की बडी संख्या मे उपस्थिति रही।
नवग्रह, श्रीपीठ, षोणश मातृका, श्री राधा कृष्ण, श्रीमद्भागवत महापुराण का वैदिक पूजन पं आशीष, पं पुष्पराज तिवारी, पं शिव शंकर सहित आचार्य गणो ने किया।



