रमज़ान का महीना गुनाहगारों के लिए अल्लाह का नायाब तोहफा है : सरताज मंज़िल

जबलपुर दर्पण। युवा भाजपा नेता सरताज मंज़िल ने बताया के 3 अप्रैल से शुरू हो रहा पवित्र रमज़ान का महीना इस साल कुछ हटके होगा दो साल कोरोना लॉकडाउन में रमज़ान हर लिहाज से फीका रहा मगर इस साल रमज़ान की तैयारियां जोरों पर हैं, दुआओं और त्याग का दूसरा नाम है रमज़ान, ये महीना मुस्लिम समुदाय के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है, रमज़ान के तीस रोज़ों में 10-10 रोज़ों के तीन अशरे होते हैं पहला आशरा रहमत यानी अल्लाह के रहम का होता है, दूसरा आशरा मग़फ़िरत यानी गुनाहों की माफी का होता है, और तीसरा आशरा निजात यानी जहन्नम की आग से खुद को बचाने का होता है, आखरी अशरे की पांच ताक रातों में से किसी एक रात में शबे कद्र होती है जो हजार महीनों से बेहतर होती है, इन तीन अशरों में पाबंदी से रोज़े रखना, नमाज पढ़ना, जिक्र अज़कार करना, कुरआन की तिलावत करना, हर तरह के गुनाहों से बचने का अहद करते हुए अल्लाह से अपने किये पिछले गुनाहों की माफी मांगना ही अल्लाह की बारगाह में सच्ची इबादत मानी जाती है,
इस रमज़ान भी नमाज और इबादत करके अल्लाह से कोरोना जैसे कहर से अपने प्यारे देश भारत के साथ-साथ पूरी दुनिया की सेहत और सलामती की दुआओं का यह सिलसिला जारी रखते हुए सबको आमदे रमज़ान की दिली मुबारकबाद।



