साहित्य दर्पण

  • शह

    ईट और कंक्रीट का शहर, पाषाण ह्रदय, पाषाण लोग । गली और चौराहों में, बिखरे कांच के टुकड़े, घायल होते…

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  • कब तक कहर ढायेगा कारोना

    कुछ लोग मानते हैं कि करोना की तीसरी लहर आ गई हैं,कुछ लोग कहते हैं आने वाली हैं।वैसे तो जितने…

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  • बरसाती हवाएँ

    ये बरसा हवाएँ धधकती गर्मी से, ऐसे राहत दे जाए जैसे प्यासे को पानी। ये बरसाती हवाएँ गर्मी के घमंड…

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  • अपनी अपनी दुनिया

    अनन्त बह्मांड में छोटा सा गोला गोले में मानव प्रजातियो के अनवरत बदलते मुखोटे परत दर परत बदलते रिश्तो में…

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  • अबकी सावन उदास है

    अबकी साल गाँव आया सावन उदास है पागलों सा लगता बदहवाश है खुद में खुद को तलाशता और बदली फिज़ाओं…

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  • “सावन आया झूम के”

    ये सावन की बारिश, ये ठंडी फुहारे पड़े जब बदन में, ये सिहरन उठादे बादल गरजना, बिजली का चमकना छम-छम…

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  • दिल की बात

    लिखने बैठी आज कलम , लिखती दिल की बात । शब्द जब मिलते नहीं , लिखती क्या फिर आज ।…

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  • शहर हो गया अपना गांव

    गाँवों की शुद्ध हवाओं में कुछ शहरीय गन्ध का मेल हुआ कुछ रौब झाड़ने के चक्कर में फैशन का यह…

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  • तितली

    तितली मेरे घर आना। सभी रँग साथ ले आना। बादलों से बारिश की बूंदे चुरा कर ले आना। नील गगनसे…

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  • बरसात

    (बाल गीत) काले काले बादल आते , संग अपने वो मेघा लाते । रिमझिम बरखा की बूंदे , आकर नई…

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