साहित्य दर्पण
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“कुछ बहका है…”
तेरे दुनिया में आकर जिंदगी , कुछ जी लिए कुछ बहका है । ये महफिल में जाम ए बेखुदी ,…
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शह
ईट और कंक्रीट का शहर, पाषाण ह्रदय, पाषाण लोग । गली और चौराहों में, बिखरे कांच के टुकड़े, घायल होते…
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कब तक कहर ढायेगा कारोना
कुछ लोग मानते हैं कि करोना की तीसरी लहर आ गई हैं,कुछ लोग कहते हैं आने वाली हैं।वैसे तो जितने…
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बरसाती हवाएँ
ये बरसा हवाएँ धधकती गर्मी से, ऐसे राहत दे जाए जैसे प्यासे को पानी। ये बरसाती हवाएँ गर्मी के घमंड…
Read More » अपनी अपनी दुनिया
अनन्त बह्मांड में छोटा सा गोला गोले में मानव प्रजातियो के अनवरत बदलते मुखोटे परत दर परत बदलते रिश्तो में…
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अबकी सावन उदास है
अबकी साल गाँव आया सावन उदास है पागलों सा लगता बदहवाश है खुद में खुद को तलाशता और बदली फिज़ाओं…
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“सावन आया झूम के”
ये सावन की बारिश, ये ठंडी फुहारे पड़े जब बदन में, ये सिहरन उठादे बादल गरजना, बिजली का चमकना छम-छम…
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दिल की बात
लिखने बैठी आज कलम , लिखती दिल की बात । शब्द जब मिलते नहीं , लिखती क्या फिर आज ।…
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शहर हो गया अपना गांव
गाँवों की शुद्ध हवाओं में कुछ शहरीय गन्ध का मेल हुआ कुछ रौब झाड़ने के चक्कर में फैशन का यह…
Read More » तितली
तितली मेरे घर आना। सभी रँग साथ ले आना। बादलों से बारिश की बूंदे चुरा कर ले आना। नील गगनसे…
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