साहित्य दर्पण
तितली
तितली मेरे घर आना।
सभी रँग साथ ले आना।
बादलों से बारिश की
बूंदे चुरा कर ले आना।
नील गगनसे उड़ती हुई
सूरज की धूप ले आना।
उपवन से थोड़े फूल
तोड़ कर ले आना।
रँग बिरंगी पंखों से सब
का मन बहलाने आना।
हमें भी हवामें उड़ने के
कर्तब सिखाने आना।
एक दिन हमें भी तेरी
जादूनगरी देखने आना।
नीक राजपूत
9898693535



