भारत कृषि प्रधान के पहले ऋषि प्रधान देश है

जबलपुर दर्पण। वैश्विक प्रदुषण एवं अधिक उत्पादन के फलस्वरुप कृषकों के द्वारा अत्यधिक मात्र में रासायनिक खादों के उपयोग के कारण अनेक प्रकार की बीमारियाँ जैसे थॉयराइड, हाईपरटेंशन, लीवर डैमेज आदि हो रहे हैं, पंजाब में तो केंसर एक्सप्रेस तक चल गई। उक्त उदगार डॉ ब्रजेश अरजरिया कृषि वैज्ञानिक एवं बोर्ड ऑफ़ मेम्बर जवाहरलाल नेहरु कृषि विश्वविद्यालय जबलपुर के द्वारा प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय शिव स्मृति भवन भंवरताल के सभागार में विश्व खाद्य एवं महिला किसान दिवस के उपलक्ष में संगोष्ठी को संबोधित करते हुए व्यक्त किये गए। आपने बताया कि हमारा फसलचक्र पुरातन काल से ही वैज्ञानिक विधि पर आधारित है, भारतीय त्यौहारों में उपयोग होने वाले खाद्य पदार्थ भी समय ऋतु अनुसार पौष्टिक और ऊर्जावान होते हैं परन्तु वर्तमान समय में अधिक लाभ लेने के कारण न केवल हमारी फसलें दूषित हो रही हैं वरण भूमि की उर्वरा शक्ति भी क्षीण होती जा रही है। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय शिव स्मृति भवन भंवरताल की संचालिका ब्र कु भावना बहन ने कहा कि जैसा अन्न होगा वैसा ही मन होगा अर्थात यदि अन्न शुद्ध होगा तो वह मन को भी शुद्ध करेगा, शुद्ध मन श्रेष्ठ सृजन ही करता है, भारत देव भूमि है अर्थात् देने वाला देश है और देने की भावना शुद्ध मन से ही संभव है, आज मानव मन अत्यंत दूषित और प्रदूषित हो चुका है जिस प्रकार हमारी धरती माता भी अत्यधिक रासायनों के उपयोग के कारण प्रदूषित हो गई है, आज पुनः आवश्यकता है अपने मन को श्रेष्ठ व शक्तिशाली बनाने की, इसके लिए राजयोग का अभ्यास अत्यंत आवश्यक है जो इस संस्था के द्वारा प्रतिदिन निःशुल्क सिखाया जाता है।
कार्यक्रम में उपस्थित डॉ एस के पाण्डेय वरिष्ठ शल्य चिकित्सक एवं डॉ लखन वैश्य रेडियोलोजिस्ट ने भी अपने विचार रखे, ब्र कु वर्षा बहन ने राजयोग की गहन अनुभूति कराई। कार्यक्रम में उपस्थित किसान भाई-बहनों को सम्मानित किया गया। आभार भाई संदीप ब्यौहार एवं कार्यक्रम का संचालन संतोष चक्रवर्ती ने किया।



