जमीन का बहाना बनाकर सरपंच ने निरस्त कर दी गौशाला

सीधी जबलपुर दर्पण । जिले की एक ग्राम पंचायत का निर्णय सभी को चौका दिया है, एक तरफ जिले भर में ही नहीं बल्कि समूचे प्रदेश एवं देश में आवारा पशुओं की सुरक्षा को लेकर सरकार ग्राम पंचायतों में गौशाला निर्माण करा रही है और यह देश की इकलौती ऐसी पंचायत होगी जिसने जमीन का बहाना बनाकर गौशाला के लिए स्वीकृत राशि वापस करते हुए निर्माण कार्य को निरस्त कर दिया है।
जी हां, यह पूरा मामला है मझौली जनपद के ग्राम पंचायत सिरौला का, जहां सरपंच एवं सचिव ने गुपचुप तरीके से ग्राम सभा आयोजित कर गौशाला निर्माण कार्य को निरस्त करने का प्रस्ताव पारित कर दिया है। मजे की बात यह है कि सरपंच सचिव ने गौशाला निर्माण को निरस्त करने का बहाना जमीन का आभाव बताया है, जबकि पुष्ट सूत्रों की मानें तो मझौली जनपद की सिरौला पंचायत में सबसे ज्यादा शासकीय भूमि रिक्त पड़ी है। बता दें कि धौहनी विधायक कुंवर सिंह टेकाम एवं जिला पंचायत सदस्य कृष्ण लाल प्यासी छोटू ने इस गौशाला निर्माण के लिए सरकार से पुर जोर कोशिश की थी कि सिरौला पंचायत में गौशाला निर्माण कराया जाय जिससे इस ग्राम पंचायत के आवारा पशुओं को सुरक्षित रखने का स्थान मिल सकेगा और किसानों को इन आवारा पशुओं से होने वाली नुकसानी से बचाया जा सके, लेकिन ग्राम पंचायत के सरपंच एवं सचिव ने अपना स्वार्थ सिद्ध करने के लिए गौशाला निर्माण कार्य को निरस्त कर दिया है।
सैकड़ों एकड़ पड़ी है सरकारी भूमि-बताया जा रहा है कि ग्राम पंचायत सिरौला में मध्यप्रदेश शासन की सैकड़ों एकड़ जमीन पड़ी है, और सरपंच सचिव ने गौशाला निर्माण के लिए भूमि का आभाव बता कर पंचायत में निरस्त करने का प्रस्ताव पारित कर दिया है। हैरानी की बात यह है कि
सैकड़ो एकड़ मध्य प्रदेश शासन की भूमि ग्राम पंचायत क्षेत्र सिरौला में उपलब्ध है, और यह क्षेत्र आदिवासी बाहुल्य है, जिला प्रशासन इस क्षेत्र को बैगा प्रोजेक्ट में भी सम्मिलित किया है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आवारा पशुओं से जनता भी परेशान रहती है, किसान अपनी फसलों की सुरक्षा को लेकर दिन रात तकवारी करते हैं लेकिन यह सब सरपंच को नहीं दिख रहा है। जनता को जब इस बात का पता चला था कि हमारे ग्राम पंचायत में गौशाला निर्माण की स्वीकृति मिल गई है तो सभी को खुशी हुई थी लेकिन अब जैसे ही उन्हें यह पता चला कि सरपंच सचिव ने गौशाला निर्माण कार्य को निरस्त करने का प्रस्ताव भेज दिया है सभी के चेहरे मायूस हो गए हैं।
पक्के निर्माण कार्य में ज्यादा फोकस-ग्राम पंचायत सिरौला में निर्माण कार्य को लेकर की जा रही अनियमितता का यह की पहला मामला नहीं है, पहले भी सरपंच सचिव पर मनमानी के आरोप लग चुके हैं। आरोप है कि इस ग्राम पंचायत में सरपंच सचिव द्वारा कच्चे वर्क एवं जनहितैषी कार्यों को प्राथमिकता नहीं दी जाती है, बल्कि पक्के वर्क वाले निर्माण कार्य को प्राथमिकता के साथ कराया जाता है। बताया जा रहा है कि यहां पुल, चेक डैम, रपटा, जैसे पक्के वर्क वाले निर्माण कार्य को लेकर विशेष रूप से प्राथमिकता दी जा रही है। जबकि गौशाला भवन का निर्माण ग्राम वासियों के लिए सबसे ज्यादा जरूरी माना जा रहा है। ग्रामीणों ने समाचार पत्र के माध्यम से कलेक्टर एवं जिला पंचायत सीईओ का ध्यान आकृष्ट कराते हुए सरपंच सचिव के खिलाफ जांच करा कर कार्यवाही की मांग उठाते हुए गौशाला निर्माण कराए जाने की गुहार लगाई है।
इनका कहना है।
ग्राम पंचायत के सरपंच सचिव के द्वारा पुलिया और पीसीसी चेक डैम का निर्माण कार्य किया जा रहा है सामुदायिक मूलक और हितग्राही मूलक योजना को नजरअंदाज करते हैं सरपंच और सचिव सगे संबंधी हैं ग्राम पंचायत की जनता जनार्दन के हित में कार्य नहीं करते हैं मध्य प्रदेश सरकार की गौशाला महत्वपूर्ण योजना है 2021-2 2 वित्तीय वर्ष में स्वीकृत हुई थी अभी तक निर्माण कार्य चालू नहीं किए हुए हैं जिसके चलते ग्राम पंचायत की जनता जनार्दन में काफी निराशा है पूर्व में भी मेरे द्वारा जिला पंचायत सीईओ को शिकायत पत्र दिया गया था जनता जनार्दन के हस्ताक्षर युक्त जांच टीम गठित करके जिला स्तर से जांच करवाने की मांग की गई थी लेकिन अभी तक कुछ कार्यवाही नहीं हुई है।
शिवेंद्र तिवारी,
सामाजिक कार्यकर्ता।



