प्रताप गैस एजेंसी में उपभोक्ताओं के साथ धोखा

प्रत्येक सिलेंडर में दो से तीन किलो कम मिल रही गैस
सीधी। शहर में संचालित प्रताप गैस एजेंसी भारत गैस के फर्जीवाड़े की चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है।
गोदाम में रिफिलिंग के दौरान उपभोक्ताओं को सिलेंडर में मिलने वाली गैस के वजन में भारी खेल किया जा रहा है। इस संबंध में मीडिया की टीम ने जब प्रताप गैस एजेंसी के गोदाम का स्टिंग ऑपरेशन किया तो चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है।
गौरतलब हो कि जिला मुख्यालय में संचालित प्रताप गैस एजेंसी भारत गैस के द्वारा कम गैस देने की शिकायत लंबे समय से आ रही थी, लेकिन इस ओर जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा शिकायत के बाद भी कोई कार्यवाही नहीं की जा रही थी, ऐसे में उपभोक्ताओं ने मीडिया का सहारा लेते हुए इस पूरे मामले का भंडाफोड़ किया है। सोमवार को जब प्रताप गैस एजेंसी के गोदाम से गैस सिलेंडर लेने पहुंचे एक उपभोक्ता ने रिलेंडर में गैस कम होने का आरोप लगाते हुए वजन कराने के लिए अड़ गया तो पहले गोदाम के कर्मचारियों द्वारा आनाकानी की गई फिर मौके पर जमा उपभोक्ताओं की भीड़ के बीच खुलती पोल को देखते हुए वजन कराने के लिए तैयार हो गए। वजन के दौरान सिलेंडर की स्थिति क्या रही यह आप सब इस समाचार के साथ प्रकाशित तस्वीर में देख सकते हैं। बता दें कि गैस सिलेंडर के दामों में लगातार बढ़ोत्तरी होने से आम आदमी की रसोई का संतुलन पहले से ही बिगड़ा है, ऊपर से यह एजेंसी संचालक उपभोक्ताओं की जेब काटने में लगें हैं, जिससे आम आदमी की रसोई में संकट खड़ा हो गया है।
तीन किलो कम मिल रही गैस-प्रताप गैस एजेंसी के गोदाम से सिलेंडर लेने के बाद मौके पर ही जब भरे हुए दो सिलेंडरो का वजन कराया गया तो करीब तीन किलों कम गैस पाई गई। हालांकि गोदाम प्रभारी ने बिगड़े माहौल को देखते हुए फौरन अपने शुरू बदल लिए और कहा कि आप दूसरा ले लीजिए। सवाल यह उठता है कि जिसने वजन की तौल करवा ली उसे तो वह दूसरा देने के लिए तैयार हो गए, लेकिन जिन्हें घर में पहुंचाकर दिया जाता है वह किसके पास सिलेंडर का वजन करवाने जाएं। एजेंसी संचालक को यह भलीभांति पता है कि होम डिलेवरी के दौरान लोगों के पास नापतौल का उपकरण नहीं उपलब्ध रहता है जिसके चलते उनकी सच्चाई उजागर नहीं हो सकती है। अब जब इसका स्टिंग ऑपरेशन किया गया तो पूरी सच्चाई सामने आ गई।
लंबे समय से चल रहा है यह खेल-प्रताप गैस एजेंसी जो भारत गैस की अधिकृत विक्रेता है, उसके द्वारा लंबे समय से सीधी में उपभोक्ताओं के साथ यह खेल खेला जा रहा है। जिसका प्रमुख कारण यह है कि यह एजेंसी सीधी की सबसे पुरानी गैस एजेंसी है जिसके चलते लोगों को मजबूरन इस एजेंसी से ही गैस सिलेंडर लेना पड़ता था, अब भले ही कई एजेंसी संचालित हो गई है लेकिन जो पहले से इनके उपभोक्ता हैं वह अभी भी इनकी चालाकी का शिकार हो रहे हैं। मजे कि बात यह है कि प्रताप गैस एजेंसी में नए कनेक्शन के नाम पर भी उपभोक्ताओं से मनमानी राशि वसूली जाती है। इसके अलावा जो चूल्हा एवं अन्य उपकरण एजेंसी द्वारा दिए जाते हैं उनकी क्वॉलिटी भी अच्छी नहीं रहती है, और जब उपभोक्ताओं द्वारा चूल्हा एवं अन्य उपकरण एजेंसी से लेने पर मना किया जाता है तो उन्हें कनेक्शन ही नहीं दिया जाता। खास बात यह है कि सीधी जिले की पहली एवं सबसे पुरानी गैस एजेंसी है, जिसके द्वारा उपभोक्ताओं से जमकर मनमानी राशि वसूली जा रही है।
कंडम वाहन से घर-घर दी जा रही डिलेवरी-प्रताप गैस एजेंसी के संचालक भरत लाल सिंह द्वारा शहर में जो होम डिलेवरी के लिए वाहन लगाया गया है उसकी हालत अयत्यंत दयनीय है, यह कहे कि पूरी तरह से कंडम वाहन हैं। जबकि भरे हुए गैस सिलेंडर लेकर चलने वाले इस वाहन की कंडीशन बेहतर होनी चाहिए लेकिन यहां विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की अनदेखी के चलते गैस एजेंसी संचालक द्वारा हर जगह मनमानी की जा रही है। वाहन की स्थिति को देख कर इसका साफ अंदाजा लगा जा सकता है कि संचालक द्वारा नियमों की किस तरह धज्जियां उड़ाई जा रही है।



