अर्नव कंस्ट्रक्शन के ठेकेदार के आगे नतमस्तक नगर पालिका

घटिया निर्माणकार्यों पर आखिर चुप क्यों है नपा के जनप्रतिनिधि,
पांढुर्णा जबलपुर दर्पण । पाँच करोड़ की योजना में भ्रष्टाचार के आरोप, वार्डों की सड़कें सालभर में उखड़ी
पांढुर्णा: मुख्यमंत्री अधोसंरचना योजना (चतुर्थ चरण) के अंतर्गत नगर पालिका पांढुर्णा को लगभग पांच करोड़ रुपये की राशि से शहर के विभिन्न वार्डों में सड़क, नाली, पुलिया और अन्य विकास कार्य कराने की स्वीकृति मिली थी। लेकिन इन कार्यों के क्रियान्वयन में भारी अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोप सामने आ रहे हैं।
नगर पालिका द्वारा इन निर्माण कार्यों का ठेका छिंदवाड़ा की अर्नव कंस्ट्रक्शन कंपनी को दिया गया था। ठेकेदार ने पिछले करीब दो वर्षों में शहर के कई वार्डों में सड़क, पेवर ब्लॉक, सीसी नाली, पुलिया, घाट और सौंदर्यीकरण जैसे कार्य किए। लेकिन शुरुआत से ही इन निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठने लगे थे।
नियमों की खुलेआम अनदेखी:-
जानकारों के अनुसार किसी भी सरकारी निर्माण कार्य के दौरान स्थल पर योजना की लागत, कार्य का विवरण, ठेकेदार का नाम और समयसीमा दर्शाने वाला सूचना पटल लगाना अनिवार्य होता है। लेकिन नगर के अधिकांश निर्माण स्थलों पर ऐसा कोई बोर्ड नहीं लगाया गया। इतना ही नहीं, नगर पालिका के जिम्मेदार तकनीकी अधिकारी भी निर्माण कार्यों की निगरानी करते दिखाई नहीं देते। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई बार निरीक्षण के नाम पर नगर पालिका के ड्राइवर को ही वहां खड़ा कर दिया जाता है।
बनते ही उखड़ गई सड़कें:-
सबसे गंभीर मामला मेघनाथ वार्ड और संत रविदास वार्ड में सामने आया है, जहां बनी सड़कों की हालत निर्माण के कुछ ही महीनों बाद खराब हो गई। कई जगह सड़क की गिट्टी ऊपर आ चुकी है और धूल के गुबार उड़ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़कें न तो तय लेवल पर बनाई गईं और न ही इंजीनियरों के स्वीकृत नक्शे के अनुसार काम किया गया।
खबर छपने के बाद दिखी औपचारिक कार्रवाई:-
मामले में जब स्थानीय समाचार पत्रों में खबरें प्रकाशित हुईं तो नगर पालिका ने ठेकेदार को सड़क की रिकोटिंग करने के निर्देश दिए। लेकिन ठेकेदार ने केवल 5 से 10 मीटर हिस्से में ही काम कर बाकी सड़क को उसी खराब हालत में छोड़ दिया।
चौंकाने वाली बात यह है कि एक वर्ष बीत जाने के बाद भी नगर पालिका द्वारा ठेकेदार के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। हर काम में अनियमितता के आरोप शहर में चल रहे कई विकास कार्यों पर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि
पुलिया निर्माण, पेवर ब्लॉक, सीसी नाली, सीसी सड़क, घाट निर्माण, रिटर्निंग वॉल, सौंदर्यीकरण
जैसे कार्यों में भी गुणवत्ता से समझौता किया गया है।
“ऊपर से संरक्षण” की चर्चा:-
सूत्रों के अनुसार छिंदवाड़ा के किसी बड़े जनप्रतिनिधि का संरक्षण अर्नव कंस्ट्रक्शन कंपनी को प्राप्त है। इसी वजह से नगर पालिका के अधिकारी और स्थानीय जनप्रतिनिधि खुलकर कार्रवाई करने से बचते नजर आ रहे हैं। शहर में चर्चा है कि विकास कार्यों में “पर्सेंटेज सिस्टम” के कारण ही घटिया निर्माण को नजरअंदाज किया जा रहा है। करोड़ों रुपये की योजना के बावजूद जनता को गुणवत्ता वाला विकास नहीं मिल पा रहा है।
अब देखना यह है कि शासन और जिला प्रशासन इस पूरे मामले में कोई जांच कर कार्रवाई करता है या फिर यह मामला भी फाइलों में ही दबकर रह जाएगा।



