माँ, मातृभूमि, व मातृभाषा का कोई विकल्प नहीं : चैतन्य महाप्रभु

जबलपुर दर्पण। प्रेमावतार, युगदृष्टा, हरि कृपा पीठाधीश्वर एवं भारत के महान सुप्रसिद्ध युवा संत 1008 स्वामी हरि चैतन्य पुरी जी महाराज ने आज यहां सनातन धर्म पब्लिक स्कूल में उपस्थित विशाल भक्त सुमदाय को संबोधित करते हुए कहा कि मां जगदंबा की आराधना व पूजा के साथ-साथ अपने जन्म देने वाले माता-पिता, मातृभूमि, भारत माता, गौ माता, गंगा माता,गीता माता आदि का भी सम्मान करकें उनका मार्गदर्शन जीवन में अपनाएं। इन सबका निरादर करने पर मां जगदंबा भी प्रसन्न होने वाली नहीं है। प्रेम, सौम्यता, संस्कार, मृदुता , वात्सल्य, दया, ममता, सरलता स्नेह, लता, मधुरता, मिठास, अपनापन, उदारता सहनशीलता, विशालता, क्षमा का जहां दर्शन हो उसे मां कहते हैं। जिसकी कोई उपमा न दी जा सके वह है मां। जिसकी कोई सीमा नहीं वह है मां। जिसके प्रेम को कभी पतझड़ स्पर्श ना करें उसका नाम है मां। परमात्मा, महात्मा, मां प्रभु पाने की प्रथम सीढ़ी है। तलहटी की अवहेलना करके शिखर छूने की कोरी कल्पना मूर्खता है। मां की अवहेलना करके परमात्मा नहीं मिलेंगे। जहां में जिसका अंत नहीं उसे माँ कहते हैं। बचपन में गोद देने वाली को बुढ़ापे में दगा देने वाला मत बनना। मां कैसी हो? इतना ही पूछ लो उसे सब कुछ मिल गया। भव्य और दिव्य आयोजन मे मुख्य रूप महेश शुक्ला, हरीश खत्री, लकी भाटिया ,सुरेंद्र चतुर्वेदी, गुलशन मखीजा,बिटटू सेठी, विनोद आनंद, जितेंद्र भाटिया, राकेश खनेजा, आनंद खनूजा, राजीव गौर, विष्णु पटेल, विध्येश भापकर, राजेन्द्र यादव, मनोज नारंग, जतिन, मनीष पोपली, राजेश रैकवार, जवाहर महाजन, अशोक रजक, सुतेष हांडा, गोल्डी आनंद, संदीप सेठी, प्रवीण शर्मा , नवीन चावला ,सुभाष सेठी सहित सनातन धर्म महासभा, श्रीकृष्ण मंदिर गोरखपुर, श्री राम मंदिर मदन महल, श्री हरि कृपा मानव सेवा संस्थान जबलपुर के कार्यकर्ताओ और श्रृध्दालुओ की बडी संख्या मे उपस्थिति रही।



