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मेंदो बाई पानी दे, धान कोदों पकन दे, लड़कन ल जियावन दे…

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नंदकिशोर ठाकुर, डिंडोरी ब्यूरो। मेंदो बाई पानी दे, धान कोदों पकन दे, लड़कन ल जियावन दे के पारंपरिक गीत गाते हुए नग्न अवस्था में छोटे-छोटे बच्चे गांव में घर-घर जाकर भिक्षावृत्ति कर रहे हैं। मामले को लेकर स्थानीय ग्रामीणों सहित बड़े बुजुर्गो का कहना है कि इस पारंपरिक टोटके को करने से इंद्र देव प्रसन्न होकर पानी की अच्छी वर्षा करवाते हैं। गौरतलब है कि इस अनोखी टोटके करने की पहल वर्षों से चली आ रही है, जहां पानी की अच्छी बारिश करने लोग टोटके को आजमाते हैं। टोटके सिद्ध करने सबसे पहले किसी नदी या तालाब में स्नान करके एक मेंढक को जिंदा पकड़ लिया जाता है। बताया गया कि गांव में लाकर पकड़े गए मेंढक को धान से चावल निकालने के प्रयोग वाली मूसर से अच्छी तरह से बांध दिया जाता है, ध्यान रखने वाली बात यह होती है कि पूरी प्रक्रिया के दौरान मेंढक जीवित ही रहे। गांव में घर घर जाकर बच्चों की टोली दरवाजे के सामने गीत गाते हुए मेंदो बाई पानी दे, धान कोदों पकन दे, लड़कन ल जियावन दे के गीत गाते हुए मेंढक को नहलाए हुए निचे पानी में समुह में शामिल बच्चे खुद नहाते हुए, चावल की भिक्षा इकठ्ठा करते हैं। यह प्रक्रिया पूरे गांव में होती है, इस सबके बीच भिक्षावृत्ति में मिले चावल को उसी नदी या तालाब में मेंढक को छोड़कर भोजन तैयार करते हैं और सामूहिक रूप से बैठकर समूह में शामिल लोगों सहित अन्य भोजन ग्रहण करते हैं। बताया जाता है कि अधिकांश क्षेत्रों में समय पर बारिश नहीं होती, जिससे खेती किसानी के कार्य पीछे हो जाते हैं।

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