पेंशन कार्यालय भोपाल स्थानांतरित न करने और सी.जी.एच.एस. जैसी चिकित्सा सुविधाएं लागू करने की इंडियन पीपुल्स अधिकारी पार्टी की मांग

जबलपुर दर्पण । मध्यप्रदेश सरकार के एक हालिया निर्णय ने पेंशनरों के लिए संकट उत्पन्न कर दिया है। इस निर्णय के तहत सभी जिला पेंशन कार्यालयों को भोपाल स्थानांतरित किया जा रहा है, जो 2011 में कर्मचारियों की सुविधा के लिए विभिन्न जिलों में खोले गए थे। इस निर्णय का विरोध करने के लिए इंडियन पीपुल्स अधिकारी पार्टी द्वारा एक बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और संस्थापक पं. पुरुषोत्तम तिवारी ने की। बैठक में पेंशनर्स और वरिष्ठ नागरिकों के हितों की रक्षा की आवश्यकता पर जोर दिया गया। पं. तिवारी ने इस कदम की आलोचना करते हुए कहा कि पेंशन कार्यालयों को जबलपुर में ही बनाए रखा जाना चाहिए, क्योंकि इस उम्र में सीनियर सिटीजन स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझते हैं, और भोपाल जैसे दूरस्थ स्थानों पर जाने में उनके लिए असुविधा और जोखिम बढ़ सकता है। इसके अलावा, पेंशन नियमों के अंतर्गत 80 वर्ष की आयु में पेंशन में 20 प्रतिशत वृद्धि का प्रावधान है, लेकिन मध्यप्रदेश सरकार इस नियम को 81 वर्ष से लागू करती है, जिससे पेंशनर्स को न्याय के लिए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाना पड़ता है। पं. तिवारी ने इस प्रक्रिया को तत्काल खत्म करने की मांग की और कहा कि 80 वर्ष की आयु में वृद्धि लागू होनी चाहिए, जैसा कि उच्च न्यायालय के निर्णयों में स्पष्ट किया गया है। पार्टी ने यह भी मांग की कि मध्यप्रदेश के सेवानिवृत्त कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए सी.जी.एच.एस. जैसी चिकित्सा योजना लागू की जाए, ताकि वे उचित और सस्ती स्वास्थ्य सुविधाएं प्राप्त कर सकें। इस बैठक में पार्टी के अन्य प्रमुख सदस्य भी मौजूद थे, जिनमें कमलेश तिवारी, ओ.पी. बिलथरिया, सी.एस.पी. दुबे, विजय कुमार तिवारी, बी.डी. साहू, सी.पी. गौतम, अवधेश गौतम, संतोष बाजपेयी, डी. के. मिश्रा और अन्य गणमान्य व्यक्ति शामिल थे। पार्टी ने सरकार से अपील की है कि वह पेंशनरों की परेशानियों को समझे और उनके लिए जीवन को सुगम बनाने के लिए ठोस कदम उठाए।



