स्टेट हैंडलूम एक्सपो में मध्यप्रदेश से लेकर जम्मू कश्मीर तक के बुनकरों के उत्पाद है मनमोहक

जबलपुर दर्पण। शहीद स्मारक, गोलबाजार में विकास आयुक्त (हाथकरघा) वस्त्र मंत्रालय भारत सरकार नई दिल्ली के सहयोग से मृगनयनी एम्पोरियम संत रविदास म.प्र. शिल्प एवं हाथकरघा विकास निगम लि. भोपाल द्वारा दिनाँक 2 से 15 अक्टूबर तक स्टेट हैण्डलूम एक्सपो आयोजित किया जा रहा है। आयोजित एक्सपो में भारत के विभिन्न 8 राज्यों से जैसे उत्तरप्रदेश, बिहार, राजस्थान, छत्तीसगढ, उडीसा, जम्मू कश्मीर, हरयाणा, मध्यप्रदेश आदि से बुनकर सहकारी समितियों, नेशनल एवं स्टेट अवार्डी बुनकरों द्वारा स्वनिर्मित उत्पादित, बनारसी जामदानी साड़ी, उडीसा की इकत साड़ी, जम्मू कश्मीर की उनी शाल बिहार भागलपुर की चादर, सिल्क साडी, राजस्थानी रजाईयाँ एवं प्रदेश की प्रसिद्ध चंदेरी महेश्वरी एवं कोसा साड़ी, सूट ,शहरवासियों के लिये बुनकरों से सीधे क्रय का अवसर उक्त एक्सपो में दिया जा रहा है। एक्सपो का समय दोपहर 12 बजे से रात्रि 9 बजे तक रखा गया है।
90 हजार की पसनीना शाल भी एक्सपो में
आयोजित स्टेट हैण्डलूम एक्सपो में जम्मू कश्मीर के काउंटर पर पसमीना साल विक्रय के लिये उपलब्ध है । पसमीना साल उनी कपड़ों में सबसे हल्की होती है। लद्दाख में या जहाँ बहुत अधिक ठण्ड पड़ती है यहाँ पर जो मे पायी जाती है उसी के उन से पसमीना शाल का निर्माण किया जाता है। भेड़ से जो उन बनता है, उसको कपडा जैसा तैयार किया जाता है, जिसे नीडिल वर्क कहते हैं उस तैयार उनी कपडे पर जरी जैसा वर्क किया जाता है । तब जाकर पसमीना शॉल तैयार होती है। किसी किसी शाल को तैयार करने में तो एक से डेढ़ वर्ष तक लग जाता है, एवं उसकी कीमत 3 से 3.50 लाख तक होती है । पशमीना शॉल के अलावा जम्मू कश्मीर के काउंटर पर महिलाओं के लिये कश्मीरी रंग बिरंगी ड्रेस भी बहुत अधिक मात्रा में उपलब्ध है।



