मेरे दो नैना मत छेड़ियो मोहे राम मिलन की आशा : शेख फरीद

जबलपुर दर्पण। रविवार 18 दिसम्बर को रांझी मड़ई में संत रामपाल जी का सत्संग संपन्न हुआ। सत्संग समारोह का लाभ लेने के लिए जिले विभिन्न गांवों से भक्त पहुंचे। संत जी ने सत्संग में शेख फरीद जी की कथा सुनाई। शेख फरीद एक शैतान बालक थे जिनकी माता उन्हें शांत रहकर नमाज पढ़ने कहा करती। वह कहा करती कि नमाज पढ़ने पर अल्लाह आपको प्रसन्न होकर खजूर देकर जायेंगे। शेख फरीद प्रतिदिन ऐसे किया करते और अल्लाह से उनका नाता मज़बूत जुड़ता गया। शेख फरीद एक मुस्लिम पीर के सान्निध्य में मनमुखी यानी शास्त्र विरुद्ध साधना किया करते थे। उनमें अल्लाह के दीदार की प्रबल इच्छा थी। संत जी ने बताया कि शेख फरीद कुंए में रस्सी बांधकर उल्टा लटकर हठयोग किया करते थे। शरीर को कष्ट देने से भगवान मिलता है ऐसी गलत धारणा हिंदू और मुस्लिम दोनों ही धर्मों के बीच है। शेख फरीद भोजन न करने के कारण अत्यंत ही दुर्बल शरीर के हो गए थे। शैतान बच्चे अक्सर उनकी रस्सी पकड़कर जोर से खुला दिया करते जिसके कारण शेख फरीद का सिर कुंए की दीवारों से टकराकर लुहुलुहान हो जाता। शेख फरीद के मरणासन्न शरीर का मांस नोचने कौए आते तो शेख फरीद एक वाणी कहा करते कि “तुम चुन चुन कागा खा लिया रे मेरे हाड़ा पर का मांसा, मेरे दो नैना मत छेड़ियो मोहे राम मिलन की आशा”। संत जी ने बताया कि शेख फरीद की प्रबल आस्था देखकर परमेश्वर कबीर ने शेख फरीद को दर्शन दिए और उन्हें हठयोग के मार्ग से हटाकर मोक्ष के लिए सत्य भक्ति का मार्ग बताया और इस प्रकार शेख फरीद का मोक्ष हुआ। संत जी पूरे विश्व में सबसे बड़े समाज सुधारक के रूप के जाने जाते हैं। संत जी ने अपने तत्वज्ञान से बच्चों एवं युवाओं में भी भक्ति की प्रेरणा की है और एक स्वस्थ और निर्मल समाज बनाने पर जोर दिया है। यही कारण है कि उनके अनुयाई आए दिन भक्ति करते हुए समाज सुधार के कार्य करते रहते हैं और नशा, दहेज, सामाजिक बुराइयों आदि से दूर रहते हैं। संत जी ने सर्व धर्मों के शास्त्रों को पढ़ने को विशेष व्यवस्था संत रामपाल जी महराज एप में की है जिसे प्ले स्टोर से डाउनलोड क्या जा सकता है।



