जीसीएफ कोऑपरेटिव सोसायटी तथा बिल्डर की मिलीभगत

शेयरधारकों के साथ छल, रजिस्ट्री के बाद भी प्लॉट पर कब्जा नहीं
जबलपुर दर्पण। सन 2013 में जीसीएफ कोऑपरेटिव सोसायटी तथा बिल्डर के मध्य करार होकर 1लाख वर्ग फुट में आवासीय परिसर विकसित किया जाना था। दादा वीरेंद्र पुरी नगर नामक विकसित की जा रही आवासीय कॉलोनी में लगभग 260 प्लॉट महाराजा कंस्ट्रक्शन बिल्डर सचिंद्र नाथ दुबे द्वारा प्लॉटिंग की जा रही थी। जीसीएफ कोऑपरेटिव सोसायटी कि तत्कालीन प्रबंधकारिणी समिति के पदाधिकारियों द्वारा बिल्डर से मिलीभगत करके 107 प्लॉट जीसीएफ को सोसाइटी के शेयरधारकों को बेचे गए, साथ ही प्लॉट खरीदने के लिए लोन भी सोसाइटी द्वारा ही दिया गया। प्रति प्लॉट 6.50 लाख रुपए प्लाट खरीदने वाले शेयरधारक लोन सोसायटी के द्वारा ही दिया गया। इसके बाद ऊपर से डेढ़ लाख विकास के नाम पर तथा 60 हजार पानी की टंकी के नाम पर इत्यादि वसूली भी की गई। जी सी एफ को सोसाइटी के तत्कालीन अध्यक्ष बीडी पांडे द्वारा स्वयं बिल्डर के पक्ष में पत्र लिखकर शेयर धारकों के ऊपर दबाव बनाकर रजिस्ट्री कराई गई तथा अन्य वसूली की गई। 2013 से आज तक ना तो शेयरधारकों को उनका पैसा लौटाया जा रहा है और ना ही उन्हें प्लॉट पर कब्जा मिल पा रहा है। अपने खून पसीने की कमाई से शेयरधारकों ने ब्याज भरकर सोसाइटी का लोन चुकाया परंतु शेयरधारकों के हाथ अभी भी खाली। सोसाइटी प्रबंधन के नकारात्मक रवैये तथा हीला हवाली से परेशान होकर पीड़ित शेयरधारकों ने रांझी थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई है शिकायत में पीड़ित शेयरधारकों ने न्याय पाने के लिए न्यायालय की शरण लेने की बात भी कही है ज्ञात हो पिछले 15 सालों से मिले हाथ यूनियन से संबंधित पदाधिकारी कोऑपरेटिव सोसाइटी चला रहे हैं।



