आराध्य के प्रति निस्वार्थ भक्ति हो तो कल्याण सुनिश्चित: भागवताचार्य अनूपदेव

जबलपुर दर्पण। जीवन में प्रति दिन,प्रति पल निस्वार्थ भाव से आराध्य की भक्ति आराधना करने से कल्याण सुनिश्चित होता है। भक्त को इष्ट देव को बाल सखा मानकर अपने सुख-दुख में सहभागी बनाना चाहिए । परमात्मा से सखा भाव रखने से सच्चे मित्र की भांति प्रभु हर आवश्यकता को पूर्ण करते हैं। सुदामा की भांति नित्य प्रति दान की भावना होना चाहिए सिर्फ याचना नहीं । निरंतर हरि नाम स्मरण करने से जीवन में सुख समृद्धि परमात्मा स्वयं प्रदान करते हैं उक्त उद्गार भागवताचार्य अनूपदेव महाराज के मुखारविंद से श्रीमद्भागवत कथा के सप्तम दिवस श्रीकृष्ण सुदामा चरित्र के प्रसंग में श्री राम मंदिर मदन महल में कहे। श्रीमद्भागवत कथा पुराण में पं राम कुशल पांडे मुख्य यजमान सुभाष चंद्र खत्री एवं अंजू खत्री ने व्यास पीठ का पूजन अर्चन आरती की। श्रीमद्भागवत कथा पुराण में महामंडलेश्वर स्वामी अखिलेश्वरानंद गिरी , गुलशन मखीजा, मनोज नारंग, विध्येश भापकर, गीता पांडे, रोशनी नारंग, मीना महाजन, विजया अरोरा, सुदेश खुराना, ऋषि, मनीष पोपली, गुरूदास मल शर्मा, जवाहर महाजन, अनिल चंडोक सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु भक्त जनों की उपस्थिति रही।



