प्राकृतिक एवं जैविक खेती करने से बीमारियों मै मिलता है छुटकारा

जबलपुर दर्पण सिहोरा कूम्ही सतधारा। कृषि विश्वविद्यालय जबलपुर से पहुंचे कृषि वैज्ञानिक आर एस शर्मा, रिचा तिवारी, मीना जाटव ने मढ़ा बंजर पहुच कर आदिवासी समाज के साथ संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कृषि संगोष्ठी के दौरान कृषि विश्वविद्यालय के आर एस शर्मा के द्वारा भारतीय किसान संघ के सुरेश पटेल को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। तत्पश्चात आदिवासियों को संबोधित करते हुए बताया की 50 वर्ष पूर्व भारत में लघु धान्य, बाजरा, ज्वार, रागी, कुटकी, प्रमुख अनाज आदिवासी क्षेत्र के प्रमुख फसलें मानी जाती हैं। परंतु पश्चिमी देश से प्रभावित होकर आदिवासी किसान आदिकाल की फसलों को भूल कर, हम वर्तमान में रासायनिक युक्त और आधुनिक फसलों की खेती कर अब हम रसायन युक्त भोजन खाने में मजबूर हो गये हैं। जिस कारण अनाज का मानव समाज और जीव जंतु पर बहुत अधिक प्रभाव पड़ता है। कृषि विश्वविद्यालय से पहुंचे जबलपुर कृषि वैज्ञानिक आदिवासियों को जागरूक करते हुए बताया कि कुटकी, सांवा, ज्वार, बाजरा, औषधि फसलें मानी जाती हैं। बाजरा में कैल्शियम, ज्वार में पोटेशियम, और फास्फोरस सहित विटामिन बी, मैग्नीज, जिंक, कॉपर, जैसे पोषक तत्व प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं, इन अनाजों को प्रतिदिन भोजन करने से कैंसर, दिल का दौरा, मधुमेह, अस्थमा, जैसे रोग की रोकथाम होती है, इन अनाजों को प्रतिदिन भोजन शामिल कर अपने जीवन को निरोगी काया बनाएं और स्वस्थ बबनाने प्रयास करें। संगोष्ठी कार्यक्रम मै मढ़ाबंजर सरपंच कोमल सिंह मरावी, जनपद सभापति सिहोरा राम कुमारी पटेल, नर्मदा पटेल, प्रदोष पटेल, राजेश यादव, शिवनारायण पटेल, हर भगत सिंह, सुम्तर्सिंह बड़करे, जियालाल ठाकुर, प्रकाश उदद्दे आदि उपस्थित रहे।



