छतरपुर दर्पण

बांदा में बेटा ही निकला पिता का हत्यारा।

बांदा जबलपुर दर्पण । कहते हैं कि जहां पिता पुत्र का रिश्ता बेहद खूबसूरत रिश्ता होता है। एक पिता के लिए पुत्र उसके सुनहरे भविष्य की बुनियाद और पुत्र के लिए पिता उसकी निश्चिन्तता का आधार होता है। एक पिता और उसकी बेटी के बीच का रिश्ता सिर्फ एक पारिवारिक रिश्ता नहीं होता। यह एक ऐसा महत्वपूर्ण प्रभाव होता है जो एक युवा के बचपन से लेकर वयस्कता के सफर को आकार देता है। यह रिश्ता न केवल परिवार को जोड़ता है बल्कि समाज में भी एक आदर्श संबंध का उदाहरण प्रस्तुत करता है। कितना चाहता है कि जो लक्ष्य वह अपने पर जीवन में प्राप्त नहीं कर पाया वह उसका पुत्र जरूर पूरा करें यानी पिता को खुशी जब मिलती है जब पुत्र पिता के स्वयं के जीवन में पूरे ना हो पाए सपने को पुत्र प्राप्त कर लेता है।वही आज के दौर में हम सब को युवा पीढ़ी को अच्छी शिक्षा, संस्कार देना चाहिए जिससे हमें अपने अदर्शों पर चलकर अपने माता-पिता की अच्छी सेवा करनी चाहिए ताकि हमारी आने वाली पीढ़ीयां को एक अच्छा संदेश मिल सके।
कलयुगी समय में सगे पुत्र संपत्ति के लालच में आकर अपने पिता को मौत के घाट उतार रहे हैं। जिससे हमारी आने वाली पीढ़ी समाज,भविष्य खतरे में है। ऐसा ही एक मामला बांदा जनपद के नरैनी कोतवाली क्षेत्र के ग्राम हड़हा गांव में देखने को मिला है।करीब चार दिन पूर्व हुई हत्या की गुत्थी पुलिस ने सुलझा दी है। जहां सगे बेटे ने ही अपने पिता की गोली मारकर हत्या की थी। हत्या की वजह प्रॉपर्टी का लालच और पिता की पांचवी शादी का डर बताया जा रहा है। पुलिस ने आरोपी बेटे और उसके सहयोगी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। हड़हा गांव निवासी मंसूर खान 45 वर्ष अब तक चार शादियां कर चुके थे। लेकिन चारों पत्नियों की मौत हो चुकी थी। उनके परिवार में 22 वर्षी बेटा माशूक खान, एक दिव्यांग बेटी और बहू शामिल है। माशूक की शादी महज आठ महीने पहले हुई थी। मंसूर ने परिवार की जिम्मेदारियों के साथ-साथ कई बार शादी करके रिश्तेदारी बढ़ाई, लेकिन इस बार पांचवी शादी की तैयारी बेटे के गले नहीं उतरी। पुलिस के मुताबिक माशूक शक था कि पिता शादी के बाद अपनी प्रॉपर्टी नई पत्नी के नाम कर देंगे। इससे उसकी हिस्सेदारी कम हो जाएगी। यही नहीं माशूक ने बताया कि उसके दादा ने 6 बीघा जमीन उसके नाम की थी। लेकिन पिता ने शादी और घर बनवाने के नाम पर चार बीघा जमीन 44 लख रुपए में भेज दी थी। जिसमें से उसे सिर्फ 5 लाख रूपय मिले। इसके अलावा घर भी आधा हिस्सा अपने कब्जे में ले लिया। पिता का यह रवैया बेटी को पहले से ही खल रहा था। मसू का कहना है कि पिता ने वादा किया था कि मरने से पहले तीन बीघा जमीन उसके नाम करेंगे। लेकिन उसे जानकारी मिली कि पिता पांचवी शादी करने जा रहे हैं। और उन्होंने होने वाली पत्नी से पहले से ही पूरी संपत्ति उसके नाम करवाने का वादा कर दिया है। यही बात माशूक को नागवार गुजरी। बीते 26 सितंबर की रात माशूक ने पिता के गरीबी दोस्त इकबाल हुसैन उम्र 51 वर्ष निवासी हड़हा को भी अपनी प्लान में शामिल कर लिया। इकबाल भी मंसूर से नाराज था, क्योंकि मृतक मंसूर ने सात बिस्वा जमीन बेचने का वादा किया था। लेकिन बीच नहीं रहा था, जमीन के लालच में इकबाल भी तैयार हो गया और उसने तमंचे की व्यवस्था कर दी। करीब रात 1:30 बजे माशूक ने सोते समय अपने पिता पर गोली चला दी। पास के कमरे में मौजूद उसकी बहन ने आवाज सुनी, लेकिन उसे लगा कि कहीं पटाखा फूटा है। इसलिए उसने ध्यान नहीं दिया। सुबह जब मंसूर का खून से लथपथ शव बिस्तर पर मिला तो पूरे गांव में सनसनी फैल गई। माशूक ने खुद ही पुलिस को पिता की हत्या की सूचना दी और थाने में अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया। लेकिन जांच में पुलिस का शक उसी पर गहरा था चला गया। पुलिस ने मृतक पिता के पुत्र माशूक को हिरासत में लेकर जब कड़ाई से पूछताछ की गई तो माशूक ने सारा जुर्म कबूल कर लिया। उसने इकबाल हुसैन की मदद से पिता की हत्या की बात स्वीकार की। पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, और उनके पास से तमंचा समेत अन्य सामान बरामद किया है। फिलहाल दोनों को जेल भेज दिया गया है। इस संबंध में क्षेत्राधिकार नरैनी श्री कृष्णकांत त्रिपाठी ने बताया कि घटना के खुलासे के लिए तीन टीम में गठित की गई थी, पुलिस ऐसे मामलों पर कड़ी नजर रख रही है। ताकि इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।

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