जबलपुर दर्पणमध्य प्रदेश

सैनिक स्कूलों का पीपीपी मोड पर संचालन की अनुमति देना दुर्भाग्यपूर्ण – तरुण भनोत

एनजीओ और आरएसएस के स्कूलों को सैनिक स्कूल की मान्यता देने पर पूर्व वित्त मंत्री ने मोदी सरकार को घेरा

जबलपुर दर्पण । इस देश में जबलपुर दर्पण । सैनिक स्कूल सोसाइटी, नवोदय स्कूल समिति और केंद्रीय विद्यालय संगठन के माध्यम से समाज के ऐसे प्रतिभावान छात्रों को अवसर देने का प्लेटफॉर्म बनाया गया था जिनकी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर भविष्य के निर्माण में छात्रों के सामने उनकी पारिवारिक आर्थिक परेशानियाँ सामने ना आएँ बल्कि सरकार अपनी ज़िम्मेदारी के साथ उन प्रतिभावान छात्रों को बेहतर प्लेटफॉर्म प्रदान करें । किंतु, पिछले 9 वर्षों के मोदी सरकार के कार्यकाल में दशकों पहले स्थापित सार्वजनिक उपक्रमों को एक-एक कर बेचा गया बल्कि शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे सरकारी संस्थानों में भी अपने उद्योगपति मित्रों और शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र के माफियाओं को शामिल कर ग़रीब और आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के सपनों को कुचलने पर आमादा है । उक्त आरोप प्रदेश सरकार में पूर्व वित्त मंत्री एवं जबलपुर पश्चिम से विधायक श्री तरुण भनोत ने सैनिक स्कूल सोसाइटी के द्वारा देश में 18 निजी, एनजीओ और आरएसएस के स्कूलों को सैनिक स्कूल की मान्यता देने पर केन्द्र सरकार पर लगाया है ।श्री भनोत ने बताया कि 10 फ़रवरी 2023 को लोकसभा में एक सदस्य के अतारांकित प्रश्न के जवाब में केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री अजय भट्ट ने बताया है कि 18 नये सैनिक स्कूलों के साथ सैनिक स्कूल सोसाइटी ने इस स्कीम के तहत समझौता हस्ताक्षर किए है जिनमें मुख्य रूप से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अधीनस्थ सरस्वती शिक्षा मंदिर, मोदी सरकार के मित्र उद्योगपति अदानी वर्ल्ड स्कूल जैसे स्कूल शामिल है । इन 18 स्कूलों में प्रदेश के मंदसौर स्थित सरस्वती शिक्षा मंदिर को भी शामिल किया गया है ।श्री भनोत ने सरकार के इस निर्णय पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए बताया कि सैनिक स्कूल की स्थापना का मूल उद्देश्य था कि ग्रामीण भारत के ऐसे प्रतिभावान छात्रों को अवसर प्रदान कर उन्हें मिलिट्री और सैन्य सेवा के लिए तैयार किया जा सके । सैनिक स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों को सैनिक स्कूल में प्रवेश के बाद उनकी शिक्षा-दीक्षा, यूनिफार्म, अनुशासन और उनके भविष्य की चिंता भी स्कूल प्रबंधन और सरकार के द्वारा की जाती थी, किंतु सैनिक स्कूलों को पीपीपी मोड पर देने से जहां ग़रीब और आर्थिक रूप से कमजोर छात्र सैनिक स्कूल जैसे बेहतर विकल्प से वंचित रह जाएँगे वही यह संस्थान अपने स्थापना के मूल उद्देश्यों से भी भटक जाएगा ।श्री भनोत ने मोदी सरकार के इस निर्णय को समाज के वंचित और प्रतिभावान छात्रों के साथ घोर अन्याय बताया । उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने सेना में अग्निवीर जैसी भर्ती प्रक्रिया और सेवा शर्तों के साथ छेड़छाड़ कर पहले ही सेना की तैयारी कर रहे देश के लाखों युवाओं और नौजवानों के सपनों पर पानी फेर चुकी है और अब सैनिक स्कूलों को भी पीपीपी मोड पर देना निश्चित रूप से समाज के वंचित, ग़रीब और आर्थिक रूप से कमजोर और मध्यमवर्गीय परिवार के प्रति मोदी सरकार की विवेकहीनता को दर्शाता है ।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button

You cannot copy content of this page

situs nagatop

nagatop slot

kingbet188

slot gacor

SUKAWIN88