नागौद में अवैध उत्खनन पर लगाम बेअसर!

सतना जबलपुर दर्पण । जिले के नागौद क्षेत्र में अवैध उत्खनन की कहानी अब खतरनाक मोड़ पर है।
जहाँ एक ओर प्रदेश सरकार लगातार अवैध खनन पर नकेल कसने की बात करती है, वहीं दूसरी ओर नागौद में प्रशासन की कार्यवाही सिर्फ़ कागज़ों तक सिमटकर रह गई है।
सबसे हैरान करने वाली बात यह कि—
पूर्व मंत्री एवं नागौद विधायक ने स्वयं लिखित शिकायत कर अवैध खनन पर रोक लगाने की अनुशंसा की,
लेकिन इसके बावजूद खनन माफियाओं का खेल खुलेआम जारी है।
अमर नदी बनी अवैध खनन का हब
नागौद की अमर नदी में रात-दिन अवैध रेत उत्खनन और परिवहन का खेल धड़ल्ले से जारी है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि नदी का प्राकृतिक स्वरूप तेजी से बिगड़ रहा है और मशीनों से हो रहा गहरा कटाव क्षेत्र के पर्यावरण को गंभीर खतरा पहुँचाता है।
वन भूमि और अलॉटेड जमीन तक खोदी जाने लगी!
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि—
अवैध उत्खनन अब सिर्फ नदी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि वनभूमि व अलॉटेड जमीन पर भी माफियाओं ने अवैध खनन शुरू कर दिया है।
इन जगहों पर खनन पूरी तरह प्रतिबंधित है, फिर भी कार्रवाई न होना कई सवाल खड़े करता है।
राजस्व अधिकारी की भूमिका पर सवाल
स्थानीय ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि
राजस्व अधिकारी और संबंधित विभागों की भूमिका संदिग्ध है।
क्योंकि बिना संरक्षण या मौन स्वीकृति के इतने बड़े पैमाने पर खनन संभव ही नहीं।
जिला प्रशासन मौन – आखिर क्यों?
लिखित शिकायतें, जनप्रतिनिधियों के पत्र, ग्रामीणों की शिकायतें…
सब कुछ होने के बावजूद जिला प्रशासन की चुप्पी अब गंभीर सवाल खड़े कर रही है।
क्या प्रशासन पर कोई दबाव है?
या फिर खनन माफिया इतने मजबूत हैं कि सरकारी आदेश भी उनके आगे बेअसर हो गए हैं?



