अध्यात्म/धर्म दर्पणजबलपुर दर्पणमध्य प्रदेश

भगवान बिरसा मुंडा के बलिदान दिवस पर दी श्रद्धांजलि

जबलपुर दर्पण। भगवान् बिरसा मुंडा, जिन्होंने मिशनरियों और अंग्रेजों के खिलाफ की थी निर्णायक लड़ाई आज उनकी 123वी पुण्यतिथि के अवसर पर शांतम प्रज्ञा आश्रम नशा मुक्ति, मनो आरोग्य, दिव्यांग पुनर्वास केंद्र में श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया, इस अवसर पर भारतीय जनता पार्टी के युवा नेता सुनील पटेल और अभिषेक कोरी जी द्वारामहान क्रांतिकारी, स्वाधीनता संग्राम के अमर सेनानी, जनजाति संस्कृति एवं अस्मिता के रक्षक, जननायक, भगवान बिरसा मुंडा जी के तेलचित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित कर श्रद्धांजलि दी गई.साथ ही आश्रम में उपचार ले रहे नशा पीड़ितों को भगवान् बिरसा मुंडा जी के जीवन के विषय में विस्तार पूर्वक बताया गया, अतिथि सुनील पटेल जी ने बताया कि बिरसा मुंडा जी ने केवल अंग्रेजी शासन के विरुद्ध ही लड़ाई नहीं लड़ी बल्कि मिशनरी द्वारा भोले भाले आदिवासियों के धर्मान्तरण के खिलाफ मोर्चा संभाला था, आज भगवान् बिरसा मुंडा को मात्र क्रन्तिकारी या स्वतंत्रता संग्राम सेनानी मानना उनके विराट व्यक्तित्व को कम करना है, बिरसा मुंडा भारत में जन्मे उन महान आत्माओं me से हैं जिन्होंने सनातन संस्कृति और भारत माता की रक्षा के लिए अपना जीवन न्योछावर कर दिया, वहीं अभिषेक कोरी जी ने बताया कि आज युवाओं को भगवान् बिरसा मुंडा जी के जीवन से प्रेरणा लेने की आवश्यकता है, हम सभी नशा मुक्त होकर भी राष्ट्र की रक्षा कर सकते हैं और नये भारत के निर्माण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं.वहीं शांतम प्रज्ञा आश्रम के संचालक मुकेश कुमार सेन ने बताया कि भगवान् बिरसा मुंडा जी भारत माता के सच्चे सपूत थे जिन्होंने धर्म और राष्ट्र की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी.आज युवाओं को भगवान् बिरसा मुंडा जी से प्रेरणा लेनी चाहिएबिरसा मुंडा ने न केवल आजादी में योगदान दिया था, बल्कि उन्होंने आदिवासी समुदाय के उत्थान के लिए भी कई कार्य किए थे। भले ही बिरसा मुंडा बहुत कम उम्र में शहीद हो गए थे, लेकिन उनके साहसिक कार्यों के कारण वह आज भी अमर हैं।

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