जर्जर किचन शेडों पर खतरा बरकरार
जबलपुर दर्पण। मध्यप्रदेश अधिकारी कर्मचारी संयुक्त संगठन के जिला अध्यक्ष दिलीप सिंह ठाकुर द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों की शासकीय शालाओं में वर्षों पुराने अनेक किचन शेडों में वर्षा ऋतु में स्व- सहायता समूह के रसोईयों को छात्र-छात्राओं का मध्यान्ह भोजन( मिड -डे मील )बनाते समय खतरा बना रहता है । अल्प मानदेय भोगी रसोईयों को छोटे -छोटे खोलीं जैसे कमरे में जहां अपर्याप्त रोशनी एवं हवादार नहीं होने से उन्हें समय-समय पर अनेक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। बढ़ती मंहगाई में मंहगा गैस सिलेंडर अनेक बार नहीं ले पाते तब जहां-तहाँ से जुटाकर लकड़ी से ही काम चलाते हैं।लकड़ी का धुंआ एवं बर्तनों की किल्लत तथा समय- समय पर अनेक बाधाओँ के बावजूद भी ग्रामीण क्षेत्रों के रसोईये अल्प मानदेय मात्र दो हजार रूपए में जान जोखिम में होने के बावजूद जर्जर किचन शेडों में गुणवत्ता पूर्ण मध्यान भोजन (मिड- डे मील) नन्हें -मुन्ने बच्चों के लिए प्रतिदिन समय पर तैयार करते है…
मध्यप्रदेश अधिकारी कर्मचारी संयुक्त संगठन के जिला अध्यक्ष दिलीप सिंह ठाकुर के अनुसार यदि कभी भी कोई अप्रिय स्थिति निर्मित होती है तो शासन-प्रशासन सर्वप्रथम प्रधानाध्यापक एवं स्व-सहायता समूह पर गम्भीर कार्यवाही करता है,जबकि वर्तमान में ऐसे अनेक ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों में किचन शेडों की स्थिति जर्जर है जो कि वर्षों पुराने पंचायत द्वारा निर्मित किये गये थे ।
मध्यप्रदेश अधिकारी कर्मचारी संयुक्त संगठन के दिलीप सिंह ठाकुर, आशीष यादव, शैलेश पंड्या, आशीष विश्वकर्मा, रवि विश्वकर्मा, अजय लोधी, माधव पाण्डेय, प्रशांत श्रीवास्तव, बहादुर पटेल, बैजनाथ यादव, विवेक साहू, दिलीप साहू, श्याम सुन्दर शुक्ला, नीरज बाजपेई, सूर्यकान्त मिश्रा, नारायण गौंड, शिव यादव, ऋषि पाठक, दुर्गेश खातरकर, धर्मेंद्र परिहार, अनुराधा नामदेव, मनोरमा ठाकुर, ज्योति कुमरे, सुनीता जॉर्ज, जया शुक्ला, अनीता वर्मा, शारदा मंडाले, राजेश्वरी दुबे, गीता कोल, सरोज कोल, दीपिका चौबे, ममता पटेल,कल्पना ठाकुर,सतीश खरे, गंगाराम साहू, भोगीराम चौकसे, चंद्रभान साहू, अंजनी उपाध्याय, भास्कर गुप्ता, विश्वनाथ सिंह, सुधीर गौर, आदेश विश्वकर्मा,नितिन तिवारी,आकाश भील, जी आर झारिया, सुरेंद्र परसते, विष्णु झारिया, महेश मेहरा, भोजराज विश्वकर्मा, अजब सिंह, सुल्तान सिंह, देवराज सिंह, इमरत सेन, रामदयाल उइके, रामकिशोर इपाचे, पंकज हल्दकार, देवेंद्र राजपूत, पवन सोयाम, पुष्पा रघुवंशी, चंदा सोनी, ब्रजवती आर्मो, भागीरथी परसते, योगिता नंदेश्वर, पूर्णिमा बेन, सुमिता इंगले, अम्बिका हँतिमारे, रेनू बुनकर, सिया पटेल, अर्चना भट्ट, शायदा खान, शबनम खान, देव सिंह भवेदी, कमलेश दुबे, राशिद अली, विशाल सिंह, राकेश मून, आसाराम झारिया, समर सिंह, कमलेश दुबे, संतोष श्रीवास्तव डेलन सिंह, क्षिप्रा सिंह, जागृति मालवीय, मनोज कोल इत्यादि ने शासन- प्रशासन से मांग की है, कि अतिशीघ्र समस्त ग्रामीण क्षेत्रों की शासकीय शालाओं में मध्यान्ह भोजन (मिड -डे मील) हेतु व्यवस्थित रूप से किचन शेडों का निर्माण किया जावे ताकि रसोईयों को असुविधा न हो एवं नन्हें मुन्ने बच्चों को गुणवत्तापूर्ण भोजन मिल सके।



