डबल-इंजिन की सरकार के बाद भी शहर की महत्वाकांक्षी परियोजना में सेना का अवरोध अनुचितः तरुण भनोत

जबलपुर दर्पण। विदित हो कि श्री कमलनाथ जी के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार के दौरान वित्त मंत्री रहते हुए यूनिवर्सिटी से डुमना एयरपोर्ट तक के सड़क के चौड़ीकरण हेतु फोरलेन सड़क निर्माण के संबंध में स्वीकृति प्रदान की गई थी | यह सड़क शहर की सबसे महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में से एक है किन्तु, प्रदेश में हुए सत्ता परिवर्तन के बाद लंबे समय के उपरांत लोक निर्माण विभाग द्वारा उक्त सड़क के फोरलेन निर्माण की प्रक्रिया शुरू की गई, परंतु यूनिवर्सिटी से लेकर नेहरा कंपनी तक लगभग 4-4.5 किमी के दायरे में सैन्य भूमि होने के कारण यह पूरी परियोजना अधर में लटक चुकी है | लोक निर्माण विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार उक्त सैन्य क्षेत्र में सड़क के फोरलेन निर्माण हेतु अनापत्ति देने के साथ ही राज्य सरकार द्वारा निर्माण के एवज में 54 करोड़ रुपये की मांग की जा रही है, जबकि इस पूरे प्रोजेक्ट का अनुमानित लागत ही 59 करोड़ रुपये है | उक्ताशय के उद्गार प्रदेश सरकार में पूर्व वित्त मंत्री एवं जबलपुर पश्चिम से विधायक श्री तरुण भनोत ने जबलपुर लोकसभा सांसद सहित दोनों राज्यसभा सांसदों को पत्र लिखकर संसद के चालू सत्र के दौरान रक्षा मंत्री के समक्ष इस विषय को रखने और हस्तक्षेप की मांग की है |
श्री भनोत ने लोकसभा सांसद श्री राकेश सिंह, राज्यसभा सदस्य श्री विवेक तनखा एवं श्रीमती सुमित्रा बाल्मीक को प्रेषित पत्र में बताया कि यह बेहद हास्यास्पद है कि 59 करोड़ के अनुमानित लागत की परियोजना में 54 करोड़ रुपये सेना को अपने सैन्य क्षेत्र में निर्माण के एवज में राज्य सरकार को चुकाना है, जबकि देश और प्रदेश में डबल-इंजिन की सरकार होने का दावा किया जा रहा है | लोक निर्माण विभाग द्वारा इस संबंध में रक्षा मंत्रालय को पत्राचार भी किया गया है ताकि बिना किसी अतिरिक्त बोझ के इस प्रोजेक्ट को पूरा करने की अनुमति प्रदान की जाएं |
श्री भनोत ने क्षेत्रीय तीनों सांसदों को प्रेषित पत्र के माध्यम से आग्रह किया है कि वर्तमान में संसद का मॉनसून सत्र चल रहा है और संसद के माध्यम से रक्षा मंत्री के समक्ष इस महत्वाकांक्षी परियोजना में सेना के बेवजह के अड़ंगों में व्यक्तिगत हस्तक्षेप कर इस परियोजना हेतु सेना के द्वारा आवश्यक सहमतियों प्रदान की जानी चाहिए ताकि जनहित एवं शहरहित में इस परियोजना को बिना किसी अतिरिक्त भार के समयावधि में पूरी की जा सके |



