पाटन के गांव गांव बिक रही अवैध शराब:शराब तस्कर ही कर रहे आंदोलन

अधिकारी लें रहे ज्ञापन:जानता मूर्खदर्शक बनकर देख रही तमाशा
जबलपुर दर्पण पाटन ब्यूरो। जबलपुर कलेक्टर डॉ इलैयाराजा टी एवं,सहायक आबकारी आयुक्त जबलपुर के सक्त निर्देशों को न मानकर पाटन नगर एवं ग्रामीणों क्षेत्र के गांव गांव शराब बेची जा रही है। और यह सब काम पाटन प्रशासन और पुलिस विभाग के संरक्षण में फल फूल रहा है। हद तो तब हो गई जब शराब गांव गांव बेचने वाले ही पाटन की सड़को पर शराब बंद करने आंदोलन करते आपको दिखाई दे रहे है। आपको जरा भी ये नजारा देखकर विचलित होने की जरूरत नही है। यह सब अवैध शराब माफियाओं की आपस की लड़ाई का मामला है। ये शराब माफिया एक ही गांव के है जिसमें से एक के पास धनेटा, राखी, चंदवा, कुंमगवा, भकलिया, उड़ना, करैया, थाना मादा,रमपुरा और भी ऐसे अनेक गांव है जहा शराब माफिया एवं इनके गुर्गे गांव में शराब बिगवाते है जिस पर प्रति पेटी 100 रुपए का कमीशन दिया जाता है। जिसके कारण अवैध शराब कारोबारी हर महीने एक अच्छी खासी मोटी रकम कमीशन के रूप में शराब दुकान संचालक से कमाते है। दूसरे अवैध शराब तस्कर को अवैध शराब बेचने को नही मिल पा रही है जिसके कारण प्रशासन पर दवाब बनाने के लिए यह सब ड्रामा किया जा रहा है। और आम लोगो को लगता है कुछ लोग नशा के खिलाप आंदोलन कर रहे है। यह मामला यही नही रुकता यही लोग सस्ती लोकप्रियता हासिल करने के लिए चंद यूट्यूब चैनलों के माध्यम से अपना प्रसार प्रचार भी करते आपको दिख जाएंगे यह बात भी सत्य है की पाटन के लगभग हर गांव में अवैध शराब बिक रही है जिसका सबसे बड़ा कोई दोषी है तो वह पुलिस विभाग,आबकारी विभाग,साथ ही प्रशासन, इन सभी विभाग के अधिकारी कर्मचारियों की मिलीभगत के चलते पाटन के गांव गांव शराब बेचकर ग्रामीणों को नशे का आदी बनाया जा रहा है। पाटन में सुबह 6 बजे से ही शराब दुकानें खुल जाती है। और पीछे की तरफ की विंडो खिड़की तो 24 घंटे खुली रहती है। जिससे शराब के खरीदारो को किसी भी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। जब इस संबंध में पाटन आबकारी उपनिरीक्षक लोहारिया से अवैध शराब गांव गांव बेचने की बात एवं तय रेट से अधिक साथ ही शराब दुकानदारों द्वारा ग्राहकों को बिल न देने की बात की गई तो साहब मीडिया के प्रश्नों के उत्तर देने से बचते नजर आय और शराब दुकानदारों के पक्ष में बात करते नजर आय, वही जिले के अन्य आबकारी उपनिरीक्षक आंगनबाड़ी को गोद ले रहे है। जरूरत की सामग्री प्रदान कर रहे है। और अवैध शराब माफियाओं पर महीने में 8-10 कार्यवाही करते ही है। लेकिन पाटन में सारे शराब दुकान संचालक अपनी दुकानें पूरी ईमानदारी से संचालित कर रहे है। ये हम नही कह रहे है ऐसा कहना है पाटन पुलिस विभाग एवं पाटन आबकारी उपनिरीक्षक साथ ही पाटन प्रशासन का है। पाटन एवं ग्रामीणों क्षेत्र में कही भी अवैध शराब नही बेची जाती है। ऐसा इसलिए है क्योंकि जवाबदार अधिकारियों कर्मचारियों को शराब दुकान संचालक द्वारा आर्थिक रूप से इतनी सेवा कर दी जाती है। इसी का फायदा दुकान संचालक उठाकर पाटन के गांव गांव अपने गुर्गे के द्वारा शराब बेचकर ग्रामीणों को नशे में झोंक रहे है। जिससे आय दिन विवाद होते है। जिला प्रशासन को चाहिए वर्षी से पाटन में अंगद के पैर की तरह जमे अधिकारी कर्मचारियों का ट्रांसफर करे जिससे कुछ हद तक नशे के कारोबारियों एवं भ्रष्टाचार पर कुछ हद तक नकेल लगाई जा सके।

पाटन आबकारी उपनिरीक्षक लोहारिया



