जबलपुर दर्पणमध्य प्रदेश
करोना लहरों मे उलझी जनता

जबलपुर दर्पण/पाटन संवाददाता । कोविड की दूसरी और कथित तीसरी लहर से जो कुछ बच जायगे वे बेरोज़गारी और भुखमरी से मर जायेंगे। शहरी क्षेत्रों में बेरोज़गारी 12% को छू रही है तो गांव में यह 7.29% है। देश की बात करें तो यहां भी 9% बेरोज़गारी का आंकड़ा दिखाई दे रहा है। पीएफ के रूप में उम्र भर की कमाई जान बचाने में खर्च हो रही है। सिर्फ भोपाल में ही 40 दिन में 10 हज़ार लोगों ने 19 करोड़ से ज़्यादा की राशि बैंको से निकाली हैं। अप्रैल महीने में देश मे 35 लाख नौकरियां छूटी हैं। देश में 700 से ज़्यादा जिलों में से 533 में कोविड पॉजिटिविटी दर 10% से अधिक रह चुकी हैं। एक चौथाई देश लॉकडाउन की मार झेल रहा है। पिछले साल माननीय ने पूरा देश बंद करा दिया था। तब 10 मई को राष्ट्रीय बेरोज़गारी 24% और शहरी बेरोज़गारी 28% के करीब थी। मैं बार-बार इतिहास दोहराता हूं, ताकि भ्रम न रहे। पेट्रोल-डीजल के दाम आज फ़िर बढ़े हैं। चौतरफ़ा महंगाई की मार है। इन सबके बीच अर्थशास्त्री मानते हैं कि यह सिलसिला पूरे साल बना रहेगा। असली बुलबुला 2022 में तब फूटेगा, जब देश की इकॉनमी ध्वस्त हो चुकी होगी और बेचने को भी कुछ नहीं होगा।
2019 में भारत को 5 ट्रिलियन डॉलर वाली इकॉनमी बनाने का जुमला फेंक कर कुर्सी पर जिनको बिठाया था फिलहाल नदियों में बहती लाशों को ही विकास की धारा मानकर चुप बैठने मे ही समझदारी है। वाकई, भारत की साम्प्रदायिक अवाम को राज करने के लिए ऐसे ही माननीय की ज़रूरत है। 2024 में फिर एक बार माननीय को वोट देना है और राष्ट्र धर्म निभाना है।



