जन्माष्टमी पर होगी पंचकुंडीय ऋग्वेद यज्ञ की पूर्णाहुति

जबलपुर दर्पण। योग साधना के द्वारा समाधि लगाकर ईश्वर के आनंद की अनुभूति की जा सकती है परंतु इसके लिए बहुत अभ्यास और वैराग्य की आवश्यकता होती है जो कि जन सामान्य को कठिन प्रतीत होता है अतः वो लोग इस मार्ग से विमुख होते जा रहे हैं। लेकिन परमात्मा के मुख्य नाम ओ३म का जप और ध्यान करना इसे सरल बना देता है इसलिए हमे नित्य ओ३म का जप करते रहना चाहिए जो हमे मुक्ति तक पहुंचा सकता है। आर्य समाज गोरखपुर में आज के व्याख्यान मे आचार्य महावीर मुमुक्षु ने श्रोताओ से उक्त विचार व्यक्त किए।
3 सितंबर से चल रहे पंचकुंडीय ऋग्वेद यज्ञ की पूर्णाहुति जन्माष्टमी 7 सितंबर को प्रातः 9.30 बजे होगी तत्पश्चात भजन प्रवचन होंगे। मुख्य वक्ता मुरादाबाद से पधारे आचार्य महावीर मुमुक्षु जी होंगे । उक्त अवसर पर पुरोहित सतेन्द्र शास्त्री के भजनोपदेश और पंडित धीरेन्द्र पांडे का प्रवचन भी आयोजित होगा । सत्र का समापन 12 बजे से आयोजित लंगर के साथ होगा। उपस्थिति का आग्रह रवि आर्य, विकास मिनोचा, सुरेन्द्र गिरधर, संजय मेहता, श्रीमती नीटू मुखी, श्रीमती मधु गुलाटी, श्रीमती ज्योति भसीन, श्रीमति कुसुम श्रीवास्तव आदि ने किया है।



