जबलपुर दर्पणमध्य प्रदेश

समरसता सेवा संगठन ने किया महर्षि वाल्मीकि जी की जयंती पर विचार गोष्ठी एवँ सम्मान समारोह का आयोजन

जबलपुर दर्पण। सब सबको जाने – सब सबको माने के वाक्य को लेकर समरसता सेवा संगठन द्वारा आदिकवि महर्षि वाल्मीकि एवँ महाराजा अजमीढ़ जी की जयंती पर विचार गोष्ठी एवँ सम्मान समारोह का आयोजन मुख्यअतिथि पेंशनर एसोसिएशन के उप प्रान्त अध्यक्ष श्रीकान्त पांडे, मुख्य वक्ता श्रीराम इंजीनियरिंग कॉलेज के प्रोफेसर डॉ अतुल दुबे विशिष्ठ अतिथि समाजसेवी गोविंद अग्रवाल, समरसता सेवा संगठन के अध्यक्ष श्री संदीप जैन की उपस्थिति में महेश भवन गोपाल बाग में किया गया।कार्यक्रम के मुख्य अतिथि ने विचार गोष्ठी को संबोधित करते हुए कहा समरसता का मतलब ही एकता, अखंडता, भाईचारा है और सेवा संगठन का सिद्धान्त भी यही है। किसी भी देश की उन्नति तभी सम्भव है जब लोगो मे एकता हो अखंडता हो।
विश्व मे ऐसा कोई देश नही जिसमे अपने देश को माता कहा जाता है सिर्फ हम ही अपने देश को भारत माता कहते है हमारे देश मे अनेको महापुरुष हुए जिन्होंने अपना संदेश सर्व समाज को दिया परन्तु वर्ण व्यवस्था को हमने जाति व्यवस्था में बदल दिया और लोग बंट गए जिससे देश में बिखराव आया एक विकृति को दूर करने के लिए आज समरसता की आवश्यकता है और इसी के माध्यम से हम लोगो के साथ देश को जोड़ने का कार्य कर सकते है।

मुख्य वक्ता प्रोफेसर डॉ अतुल दुबे ने विचार गोष्ठी को संबोधित करते हुए कहा सतयुग में धर्म के चार स्तंभ हुआ करते थे जिनमें तप शुद्वि सत्य और दया था। देवता स्वयं शिक्षा देने आते थे मनुष्य का मानसिक स्तर उच्च था इसे आदर्श युग कहा जाता था। त्रेता युग आया इसमें धर्म के चार स्तम्भो में से तप का एक स्तम्भ हट गया। इसमें भौतिक कार्य प्रारंभ हुआ भौतिकवाद आया तो लोगो को शिक्षित करने वेदों की आवश्यकता महसूस हुई और इस युग मे ही वेदों ग्रंथो का लेखन प्रारम्भ हुआ इसी युग मे भगवान श्रीराम का जन्म हुआ जो इस युग के आदर्श पुरूष हुए। इसी युग मे महर्षि का वाल्मीकि का जन्म हुआ और उन्होंने ही श्रीराम जी की जीवनगाथा को काव्य के रूप में लिखा।

उन्होंने कहा इसी युग मे राजस्थान में प्रसिद्ध अजमेर, (जिसका प्राचीन नाम अज्मेरू था) शहर बसाकर मेवाड़ की नींव रखने वाले महाराज अजमीढ़ जी, मैढ़क्षत्रिय स्वर्णकार समाज के आदि पुरुष माने जाते हैं। ऐसा कहा जाता है कि महाराज अजमीढ़, ब्रम्हा द्वारा उत्पन्न अत्री की 28वीं पीढ़ी में त्रेता युग में जन्मे थे। वे मर्यादापुरुषोत्तम श्रीराम के समकालीन ही नहीं बल्कि उनके परम मित्र भी थे। ऐसा कहा जाता है कि महाराजा अजमीढ़ देव जी धर्म-कर्म में विश्वास रखते थे, और उन्हें खिलौने तथा आभूषण बनाने का बेहद शौक था। अपने इसी शौक के चलते वे अनेक प्रकार के खिलौने, बर्तन और आभूषण बनाकर उन्हें अपने प्रियजनों को भेंट किया करते थे। उनके इसी शौक को उनके वंशजों ने आगे बढ़ाकर व्यवसाय के रूप में अपना लिया। तभी से वे स्वर्णकार के रूप में जाने गए और आज तक आभूषण बनाने का यह व्यवसाय उनके वंशजों द्वारा जारी है। 

उन्होंने इसके बाद द्वापर युग में धर्म के दो आधार स्तम्भ हट गए और धर्म सत्य और दया पर टिक गया इसी युग मे भगवान श्रीकृष्ण जा अवतार हुआ और महाभारत का ऐतिहासिक युध्द हुआ। भगवान श्रीकृष्ण के जाने के साथ ही इस युग का समापन हुआ।इसके बाद कलयुग आया जिसमे धर्म सिर्फ एक स्तम्भ दया पर टिका है इस युग मे भौतिकता सबसे उच्च कोटि की है लोगो को धर्म जाति के आधार पर बाँटने का कार्य तेजी से हुआ और इसीलिए आज सबसे अधिक आवश्यकता समरसता की है जिस कार्य को समरसता सेवा संगठन द्वारा किया जा रहा है।कार्यक्रम की प्रस्तावना रखते हुए संगठन के अध्यक्ष संदीप जैन ने कहा समरसता कोई नया विषय नही है बल्कि समरसता भारत की संस्कृति और परंपरा में है और आप सभी के सहयोग से विगत 6 माह में हमने समरसता सेवा संगठन के कार्यो से समरसता के कार्य को लोगो तक पहुँचाने का करत किया है और कई संगठन इस क्षेत्र में कार्य कर रहे है और उसी कार्य को आगे बढ़ाते हुए सब सबको जाने और सब सबको माने के मंत्र को लेकर समरस भारत समर्थ भारत के धेय्य को लेकर लोगो तक अपने महापुरुषों, देवियों और आराध्यजनो के संदेश को पहुँचाने का कार्य कर रहे है क्योंकि हमारे आराध्यो ने किसी समाज विशेष को संदेश नही दिया बल्कि सर्व समाज को अपना संदेश दिया है।

संगठन की ओर से सदस्य श्री धीरज अग्रवाल ने विचार गोष्ठी में संगठन वक्ता के रूप में अपने विचार व्यक्त किये। कार्यक्रम का संचालन सचिव उज्ज्वल पचौरी एवँ आभार संतोष झारिया ने व्यक्त किया।सम्मान – कार्यक्रम में वाल्मीकि समाज से ईश्वरलाल डागौर, चमन दोहरे, अशोक महरोलिया, रवि बोहत एवँ स्वर्णकार समाज से राजा सराफ, राजेन्द्र सराफ, नवीन सराफ, बालकृष्ण सराफ, सुरेंद्र सोनी, विनीत सोनी, शरद सोनी, ओम सोनी, संतोष सोनी, सतेंद्र सोनी, धर्मेंद्र सोनी, राजेश सराफ, महेंद्र सोनी, महेश सोनी, रिंकू सोनी, विजय सोनी, श्याम सोनी एवँ महिला संगठन की अंजना सराफ, मीना सोनी, शोभा सोनी, मंजू सोनी, नीता सराफ, गीता सोनी, प्रतिष्ठा सोनी, प्रिया सोनी, रश्मि सोनी, गायत्री सराफ, सिदेश्वरी सराफ का सम्मान किया गया।कार्यक्रम में शरद भाई पालन, महाकौशल चेम्बर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष रवि गुप्ता, प्रोफेसर रविकांत तिवारी, कौशल किशोर दुबे, राजकुमार पटेल, मथुरा प्रसाद चौबे, अभिजात कृष्ण त्रिपाठी, राजा सराफ, आलोक पाठक, रामबाबु विश्वकर्मा, प्रशान्त दुबे, सुरेश पांडे, प्रदीप पटेल, पवन जैन, संतोष जैन, संग्राम सिंह राठौर, डॉ अनन्त कोरी, लक्ष्मी नारायण चंसोरिया, राकेश शुक्ला, सनी सोनकर उपस्थित थे।

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