जबलपुर दर्पणमध्य प्रदेश

साक्षात्कार चर्चित हस्ताक्षरों का – एक संवाद एवं परिचर्चा

जबलपुर दर्पण। राष्ट्रीय चेतना परिवार के तत्वाधान में दिनांक 24 दिसंबर, 2023 को ‘साक्षात्कार चर्चित हस्ताक्षरों का – एक संवाद एवं परिचर्चा’ की दूसरी कड़ी का आयोजन किया गया, जिसके अंतर्गत मराठी के सुप्रसिद्ध साहित्कार डॉ. दामोदर खडसे जिन्हें अखिल भारतीय स्तर पर सृजनात्मक लेखन और अनुवाद के लिए भारत सरकार एवं विभिन्न राज्यों की साहित्य अकादमियों एवं स्वायत्त संस्थाओं द्वारा सम्मानित किया है| उपन्यास ‘काला सूरज’ के लिए महामहिम राष्ट्रपति डॉ. शंकर दयाल शर्मा और राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल के करकमलों द्वारा केंद्रीय हिंदी संस्थान का गंगाशरण सिंह पुरस्कार मिला है| बाल साहित्य की चर्चित रचनाकार श्रीमती गिरिजा कुलश्रेष्ठ जो बाल साहित्य को समृद्ध कर रही हैं| इस साक्षात्कार में उनसे बातचीत की अनिता तोमर ने|
कार्यक्रम का शुभारंभ आमंत्रित साहित्यकार डॉ. दामोदर खडसे, श्रीमती गिरिजा कुलश्रेष्ठ, संस्थापक अरविन्द गुप्ता, अध्यक्ष डॉ. मंजु गुप्ता, डॉ. जयश्री अयंगर, श्रीमती सुमित्रा खडसे, संरक्षक जगदीश प्रसाद गोविल जी द्वारा दीप प्रज्ज्वलन से हुआ | इसके बाद संस्थापक जी ने मुख्य अतिथियों, श्रोताओं और छात्रों का स्वागत किया और राष्ट्रीय चेतना मंच की जानकारी साझा की| डॉ. दामोदर खड़से जी से साक्षात्कार के दौरान उनके लेखन, उनके साहित्यिक सफ़र, संघर्ष, एक गाँव से शुरू हुई उनकी यात्रा,अनुवादक के रूप में कठिनाइयों, हिंदी भाषा की वर्तमान स्थिति, पाठकों की रूचि आदि अनेक पहलुओं पर बातचीत हुई| गोयन्का पुरस्कार से सम्मानित अपने उपन्यास ‘बादल राग’ के विषय में उन्होंने बताया कि ‘राग’ शब्द का अर्थ है, जिसमें दोहराव ना हो| बादल राग जिसमें निरंतर भावनाएँ बरसती रहती हैं इसलिए इसका शीर्षक ‘बादल राग’ रखा है| पुस्तकों के पाठकों की घटती संख्या पर उन्होंने अपने विचार रखते हुए कहा कि जब हम जानकारी से ज्ञान की या बढ़ेंगे, तब निश्चित रूप से पाठक किताबों में प्रवेश करेंगे और वह किताब का स्वरूप लैपटॉप पर हो या कागज पर हो उससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा| बाल साहित्यकारा गिरिजा कुलश्रेष्ठ जी के अनुसार बच्चों को उपदेश देना पसंद नहीं| पाठ्यक्रम में भी बदलाव की आवश्यकता है| ‘मीकू फँसा पिंजरे में’ उस कहानी के अंत को इसी कारण प्रकाशक के कहने पर मुझे बदलना पड़ा| कहानी की गुणवत्ता होनी चाहिए, संख्याओं पर ध्यान नहीं देना चाहिए| बाल साहित्य हल्का-फुल्का और मनोरंजक होना चाहिए| अनिता तोमर द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम के समापन की घोषणा की गई|

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