संस्कार भारती का कला साधक संगम आयोजन बेंगलुरु में हुआ

जबलपुर दर्पण। लुरू स्थित आर्ट आफ लिविंग अन्तर्राष्ट्रीय केन्द्र में समरसता व सौहार्द केन्द्रित विषय पर किया गया। भारतीय सिनेमा में समरसता प्रसंगों की संकलित चल चित्र सामाजिक समरसता निर्माण में कला और साहित्य की भूमिका विषयों पर संगोष्ठी हुई l सांस्कृतिक कार्यक्रमों के अन्तर्गत विभिन्न प्रदेशों से आए कलाकारों द्वारा संत समरसता वचनों की संगीतमय पओबड़आ गोघल और रासड़ो लोककला शैलियों , महाभारत व रामायण आधारित , भरत नाट्यम ,कत्थक नृत्य ,बाल शिवाजी, कृष्ण कहे, लघु नाटिका की सुन्दर प्रस्तुति दी गयी। दो कलाकारों को भरत मुनि सम्मान से सम्मानित किया गया। सभी प्रदेशों से आए कलाकारों एवं प्रतिभागियों द्वारा अपने अपने प्रदेशों में आने वाले उत्सवों की झलक व प्रदेशीय परिधानों में समरसता और सौहार्द का संदेश देने वाली झांकियां निकाली गई । शोभा यात्रा में कश्मीर से कन्याकुमारी तक विविधता में एकता के सुन्दर दर्शन हो रहे थे । सभी में बहुत ही उल्लास व उत्साह अदभुत था। समरसता युवा कविसम्मेलन में युवा कवियों ने अपनी कविता के माध्यम से भारतीय संस्कृति में विद्यमान समरसता के दृष्टिगत काव्य पाठ किया l समापन कार्यक्रम में परमपूज्य सर संघचालक श्री मोहन भागवत व श्री श्री रविशंकर का मार्गदर्शन मिला। महाभारत के कृष्ण नीतीश भारद्वाज, लोक गायिका मालिनी अवस्थी, श्रीराम लला के मूर्तिकार अरुण योगराज की उपस्थिति विशेष रही। संस्कार भारती मेरठ महानगर से डा0मंयक अग्रवाल, शील वर्द्बन, डॉ 0दिशा दिनेश ,सुधाकर आशावादी ,राकेश जैन ने सहभागिता की ।



