रूरल टेक्नोलॉजी वैल्यू एडेड कोर्स का समापन

जबलपुर दर्पण। शासकीय विज्ञान महाविद्यालय के प्राणी शास्त्र एवं जैव तकनीकी विभाग द्वारा 2 फरवरी से प्रारंभ किए गए रूरल टेक्नोलॉजी वैल्यू एडेड कोर्स में आज अंतिम दिवस डॉ अनिरुद्ध मजूमदार ,वैज्ञानिक राज्य वन अनुसंधान संस्थान, जबलपुर एवं उनकी टीम ने विद्यार्थियों को लाख की खेती के बारे में बतलाया कि किसान अपने खेतों में खेती के साथ अतिरिक्त आय हेतु लाख की खेती भी कर सकते हैं । लाख का उत्पादन पलाश ,बेर एवं कुसमी के पौधों पर बहुत अच्छे से किया जा सकता है। लाख का मूल्य किसानों को 600 से 2000 प्रति किलो ग्राम के हिसाब से लाख की वैरायटी को देखते हुए मिलता है । भारत लाख का एक बहुत बड़ा निर्यातक है, मध्य प्रदेश में मंडला बालाघाट ,होशंगाबाद एवम डिंडोरी आदि जिलों में लाख की खेती हो रही है । लाख से कई प्रकार के उत्पाद बनाए जा सकते हैं ।
विभाग द्वारा आयोजित रूरल टेक्नोलॉजी के कोर्स के दौरान पंचगव्य पर आधारित उत्पाद बनाना जैसे गोबर के तथा गोमूत्र के कई उत्पाद अर्चना सोनी एवं डॉ बृजेश कुमार राय एवम डा राहुल शर्मा ने विद्यार्थियों को बतलाए एवम तैयार करवाए । शासकीय वेटरनरी कॉलेज नानाजी विश्वविद्यालय के पंचगव्य यूनिट का भी विद्यार्थियों ने भ्रमण किया जहां उन्होंने गोबर की लकड़ी गमले दिए एवं उत्पाद देखें एवं स्वयं बनाए, डॉ माधुरी पांडे ने मछली पालन के बारे में एवम डॉ अनूप कुमार सक्सेना जवाहर लाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय ने मधुमक्खी पालन एवं शहद उत्पादन पर अपना व्याख्यान दिया । महाविद्यालय के प्राचार्य डा ए एल महोबिया के मार्गदर्शन में आयोजित इस कोर्स में लगभग 100 विद्यार्थी उपस्थित रहे एवं उन्होंने विभिन्न प्रकार की ग्राम उपयोगी तकनीकी को सीखा ।
कार्यक्रम का संचालन डॉक्टर शंपा जैन एवं धन्यवाद ज्ञापन विभाग की अध्यक्ष डॉ सुनीता शर्मा ने किया । कार्यक्रम में विभाग के प्राध्यापकों एवम कर्मचारियों का सहयोग रहा।



