मध्य प्रदेश

शिक्षामंत्री का बयान शिक्षको में भय का वातावरण पैदा करने वालाः धर्मेन्द्र गहलोत

राजस्थान। राजस्थान शिक्षक संघ (प्रगतिशील) के मुख्य महामंत्री धर्मेंद्र गहलोत ने राज्य के मुख्यमंत्री भजनलाल को ज्ञापन भेज शिक्षामंत्री मदन दिलावर के शिक्षक विरोधी बयानों पर हस्तक्षेप करने की दरकार की है।
शिक्षक संघ(प्रगतिशील)के मीडिया प्रभारी गुरुदीन वर्मा के अनुसार मुख्य महामंत्री गहलोत ने ज्ञापन में लिखा है कि मदन दिलावर जब से राज्य के शिक्षा एवम पंचायतीराज मंत्री बने है तब से राज्य भर के शिक्षकों के प्रति नफरती बयान देने से बाज नहीं आ रहे है।शिक्षामंत्री के बयानों से यह लगता है कि वे चाहते है राज्य के सरकारी शिक्षक छात्र अनुशासन के लिए एक शब्द भी ना बोले चाहे वो कक्षा में कितना ही उद्दंड करे। और यदि बोले तो छात्र को भी ईंट का जवाब पत्थर से देने की छूट है। ऐसा लगता है राज्य के शिक्षा जगत में निजीकरण को बढ़ावा देने के लिए यह सुनियोजित अलोकतांत्रिक बयानबाजी की जा रही है। शिक्षक चरित्रहीनता करे तो उनके घरों पर बुलडोजर चलेगा तो क्या अन्यों को चरित्रहीनता की छूट दी जा रही है । अब सीकर के किसी विद्यालय के कार्यक्रम में शिक्षामंत्री का यह बयान आया कि सत्रांको को यदि बोर्ड परीक्षा अंको के आधे से से अधिक दिया गया तो उस शिक्षक पर बर्खास्तगी तक की कार्यवाही की जाएगी। छात्र द्वारा प्राप्तांक संबंधित परीक्षा की उस वक्त पेपर में पूछे गए प्रश्नों की तैयारी पर निर्भर करता है। अलग अलग परीक्षकों के उत्तर पुस्तिका मूल्यांकन के दृष्टिकोण भी अलग अलग होते है।
शिक्षक अध्यापन में कक्षा के सभी छात्रों को एक समान ज्ञानप्राप्ति का अवसर देते है।परीक्षा में मेहनत और भाग्य प्रबल है तो अंको की बेहतर प्राप्ति कोई नही रोक सकता। विद्यालय में शिक्षक की नियुक्ति बेहतर अध्यापन हेतु होती है ।यदि छात्र नियमित अध्ययन रखे तो अच्छे अंक भी नियमित आते है इसमें अंको के कम ज्यादा आने का उत्तरदायित्व शिक्षक का आंकलित नही किया जा सकता। विद्यालयों में बच्चे सालो साल शिक्षकों के संपर्क में रहते है तो सत्रांक में सहानुभूति का मानवीय दृष्टिकोण रखने से रोका नहीं जा सकता।
शिक्षामंत्री एक विचारधारा से बंधित होकर इस बयान देने से नहीं रुके तो राज्य भर में शिक्षक एवम शिक्षक संगठन विरोध करने से पीछे नहीं हटेंगे। शिक्षामंत्री को यह जान लेना चाहिए की राजकीय विद्यालयों में भी हिंदुस्तानी ही पढ़ रहे है और पढ़ा रहे है।अतः राजकीय संस्थानों से नफरत के भाव त्यागकर सामंजस्य का माहौल बना शिक्षा जगत में शांति और प्रेम स्थापित करने में सहयोग की भूमिका निभावे।

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