जबलपुर दर्पणमध्य प्रदेश

मूंग उड़द खरीदी को लेकर भारतीय किसान संघ का घंटाघर पर प्रदर्शन आज

बलपुर दर्पण। ग्रीष्मकालीन मूंग उड़द खरीदी को लेकर बनी उपार्जन नीति में खामियों के चलते प्रदेश का किसान सरकार से नाराज है। प्रदेश के मूंग उड़द उत्पादक पच्चीस से अधिक जिलों के किसान भारतीय किसान संघ के नेतृत्व में आंदोलन कर रहे हैं। उक्ताशय की जानकारी देते हुये प्रांत महामंत्री प्रहलाद सिंह पटैल ने बताया कि मूंग उड़द खरीदी को लेकर बनी उपार्जन नीति में पिछले वर्ष 2023 की तुलना में इस वर्ष 2024 में जो बदलाव किये गये हैं। वह किसान व कृषि हित में कतई नहीं कहे जा सकते हैं। श्री पटैल ने कहा कि प्रदेश सरकार तक अपनी बात पहुंचाने के लिये 9 जुलाई मंगलवार को बारह बजे जिले के किसान भारतीय किसान संघ के नेतृत्व में घंटाघर में एकत्रित होकर प्रदेश के मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर को अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपेगें।

इस अवसर पर भारतीय किसान संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख राघवेंद्र सिंह पटैल, प्रदेश उपाध्यक्ष ओमनारायण पचौरी, प्रांत संगठन मंत्री भरत पटैल, प्रांत महामंत्री प्रहलाद सिंह पटैल, प्रांत कार्यालय मंत्री आलोक पटैल, पुखराज सिंह चंदेल, नंदकिशोर परोहा, जिलाध्यक्ष मोहन तिवारी, जिला मंत्री रामदास पटैल, जिला सह मंत्री धनंजय पटैल, उपाध्यक्ष सुनील पटेल, पाटन तहसील अध्यक्ष मुकुल पचौरी, मंत्री रीतेश पटैल, शहपुरा तहसील अध्यक्ष वीरेंद्र सिंह, मंत्री धरम पटेल, पनागर तहसील अध्यक्ष जितेंद्र पटैल, सहमंत्री नरेश मिश्रा, विनय पटेल, देवीदीन सेन, जागेशवर काछी, भोलाराम पटैल, अमित पटैल, मनीष पटैल, मलखान सिंह राजपूत, अतुल पटैल, रामकृष्ण सोनी, मंझोली तहसील अध्यक्ष वीरेंद्र साहू, अटल पटेल, जिला प्रचार प्रमुख भरत पटैल, सुरेश पटैल, रीतेश पचौरी, प्रेमचंद कुर्मी, हेमंत पटैल टिपरा आदि ने अधिक से अधिक किसानों से ज्ञापन कार्यक्रम में उपस्थिति की अपील की है।

ये है किसानों की मांगे
2023 की उपार्जन नीति में प्रति हैक्टेयर 16 क्विंटल मूंग खरीदी गई थी, जिसे 2024 में प्रति हैक्टेयर घटाकर 8 क्विंटल कर दिया गया है। इसे किसान प्रति हैक्टेयर 16 क्विंटल करने की मांग कर रहे हैं। साथ ही प्रतिदिन प्रति किसान 40 क्विंटल खरीदी सीमा को 25 क्विंटल कर दिया है। किसानों का कहना है इसे 40 क्विंटल ही रखा जाये। धर्मकांटा से तौल कराने की मांग के साथ विलंब से शुरू हुई मूंग खरीदी के कारण अंतिम तिथि भी बढ़ाने की मांग किसान सरकार से कर रहे हैं।

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