मण्डला दर्पणमध्य प्रदेश

हेबीटेट राईट्स के अंतर्गत अमवार में बैठक आयोजित

मण्डला। सहायक आयुक्त आदिवासी विकास से प्राप्त जानकारी के अनुसार अनुसूचित जनजाति एवं अन्य परम्परागत वन निवासी (वन अधिकारो की मान्यता) अधिनियम 2006 की धारा 3(1)(ड) में विशेष पिछड़ी जनजाति के गृह और आवास (हेबीटेट राईट्स) के सामुदायिक अधिकारों का प्रावधान किया गया है। जिले की विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा समुदाय के हैबीटेट राइट्स को मान्यता देने के लिए कलेक्टर हर्षिका सिंह के निर्देशानुसार जनपद पंचायत मवई के अंतर्गत ग्राम अमवार में 16 अगस्त को विशेष ग्रामसभा की बैठक का आयोजन किया गया है। जिसमें जनपद पंचायत मवई के अंतर्गत ग्राम पंचायत अमवार के पोषक ग्राम रहेटाखेरा, औरा घुघरा, सुन्हेरा, नया गांव, औरा भिमरा, मेर टोला, खिरका टोला, पटपरा, रहता घुईया के बैगा समुदाय के लोग, सरपंच, अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) बिछिया, सहायक आयुक्त, जनजातीय कार्य विभाग मण्डला, वनपरिक्षेत्र अधिकारी मवई, क्षेत्र संयोजक, नायब तहसीलदार पटवारी उपस्थित रहे।
ग्रामसभा में सर्वप्रथम ग्रामसभा अध्यक्ष के लिए सुखराम पिता धरमू का सर्व सहमति से मनोनयन किया गया। जिसके पश्चात् ग्रामसभा में ग्राम पंचायत अमवार द्वारा प्रस्तुत विशेष पिछड़ी जनजाति (बैगा समुदाय) के हेबीटेट् राईट के दावे पर विस्तार से चर्चा की गई। जिसमें बैगा समुदाय के लोगों द्वारा बतलाया कि हमारे पूर्वजों के समय से इस क्षेत्र जंगलों पर निस्तार करते आ रहे हैं, और हमारा पूरा जीवन चक्र इन्ही जंगलों के बीच गुजरता है। जंगलों से ही हम अपनी जीविका के लिये लघु वनोपज का संग्रहण करते हैं और उसका विक्रय कर ही अपनी एवं परिवार की जीविका चलाते हैं। साथ ही इन्ही जंगलों में हमारे पूर्वजों के द्वारा पूजा स्थान, श्मशान घाट, गौठान इत्यादि चिन्हित किये गये हैं। जिनका निस्तार हम आज भी करते आ रहे हैं। ग्राम सभा द्वारा अमवार पंचायत के अंतर्गत आने वाले वन क्षेत्र का नजरी नक्शा भी तैयार किया गया है। जिसमें बैगा समुदाय द्वारा प्राचीन काल से निस्तार व उपयोग किये जा रहे हैं। संसाधन एवं स्थानों का चिन्हांकन प्रदर्शित किया गया। उक्त नजरी नक्शा का ग्राम सभा में सभी के समक्ष प्रस्तुत किया गया जिसमें वन विभाग के द्वारा भी उक्त हेबीटेट् राईट के नजरी नक्शा का बारिकी से अवलोकन किया गया। ग्राम सभा में उपस्थित बैगा समुदाय के लोगों के द्वारा प्राचीनकाल से विस्तार किये जा रहे हैं। जंगल की जमीन एवं लघु वनोपज के बारे में नजरी नक्शे में चिंहान्कन किया गया। ग्राम सभा की कार्यवाही में निकटतम पंचायत के सरपंच सचिव उपस्थित हुये। जिनके द्वारा भी उक्त हेबीटेट राईट देने की प्रक्रिया की सहमति दी गई।
हेबीटेट राईट चार बिन्दुओं पर आधारित है – पारिवारिक निर्धारक। आर्थिक निर्धारक। जनानकीय निर्धारक। भौतकीय व सांस्कृति निर्धारक।
हेबीटेट राईट से संबंधित स्थलों का सत्यापन ग्राम सभा में उपस्थित बैगा समुदाय, राजस्व विभाग, वन विभाग, आदिवासी विभाग के अधिकारियों एवं अन्य प्रतिनिधियों की उपस्थिति में मौके पर जाकर स्थल सत्यापन किया गया। उपरोक्त मापदण्डों के अनुसार हेबीटेट राईट दिये जाने की कार्यवाही ग्राम सभा में की गई। अंत में ग्रामसभा के अध्यक्ष सुखराम पिता धरम् की अनुमति से सर्वसहमति अनुसार कार्यवाही विवरण का वाचन किया गया एवं ग्राम सभा की अनुशंसा अनुसार प्रस्ताव उपखण्ड स्तरीय समिति को भेजने की कार्यवाही की गई।

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