साहित्य दर्पण

सामाजिक-आध्यात्मिक सदभाव के प्रतीक आलोक

हमें तो अंतर्मुखिया लगे एड. आलोक गुप्ता। वकालत के पेशे के कारण इनका चेहरा जरूर कठोर दिखाई देता है परंतु इनका हृदय लगता है ज्यों भलमनसाहत सज्जनता भावुकता संवेदनशीलता धर्मपरायणता से भरा हो। कभी कभी तो ऐसा लगता है की ये बहुत कुछ कहना चाहते हैं परंतु संकोच के कारण कह नहीं पाते, हमने कई बार ऐसा महसूस किया है। ब्योहारी जिला शहडोल में 19 जून को जन्मे थे तो उस समय इनके माता-पिता भगवान शंकर के परम भक्त कहलाते थे। बचपन से ही आप भगवान शिव के भक्त रहे हैं। यहां तक कि आज अपने निवास सत्य प्रकाश, तिलहरी में अपने सदन का नामकरण भी ईशान किया हुआ है। श्री श्री 1008 श्री रविशंकर जी के आप परम अनुयायी हैं। आचार्य रजनीश ओशो के सिद्धांतों को भी मानते हैं। गांव की सोंधी सोंधी खुशबू, माता-पिता द्वारा प्राप्त संस्कार, और भारतीय संस्कृति को आलोक गुप्ता कभी नहीं भूले। इसका ज्वलंत उदाहरण इस माह की 7 जून को देखने को मिला। 7 जून को आलोक गुप्ता के पूज्य पिता श्री राजेंद्र गुप्ता (रज्जन) की पुण्य तिथि थी। उनकी स्मृति में आलोक ने संस्कार नगर तिलहरी की ख्याति प्राप्त बाल मानस रामायण मण्डल के (अध्यक्ष श्री सुरेश तिवारी, रमेश तिवारी, रूप नाथ यादव,भीम सेन महोबिया) से सुंदरकांड का संगीतमय मनभावन पाठ करवाया।पूरा वातावरण श्रीराम मय हो गया। आलोक- सीमा ने दिल खोलकर प्रसाद वितरित कर पुण्य लाभ लिया । इसी प्रकार लगभग 3 साल पहले अपने बेटे ईशान के जन्मदिन के अवसर पर सोसायटी के पार्क में श्री श्री जी की दत्त जी महाराज की कीर्तन मंडली को बुलाकर भजन‌ कीर्तन करवाया। स्वयं भी बहुत सुंदर सुंदर भजन गाए। निसंदेह आलोक बहुत ही अच्छे एक गायक है। यह पूरी सोसाइटी जानती है। सोसायटी के पार्क में कोई भी फंक्शन हो और आलोक का गायन न हो तो फंक्शन अधूरा लगता है। जब कोई गीत गाते हैं तो गायन में डूब जाते हैं। तरुन्नुम‌ में मस्ती में गाते ही चले जाते हैं गाते ही चले जाते हैं। गायन के अभ्यास में हमने इन्हें सदैव रत देखा है। जब जब हम सोसाइटी की गलियों में घूमते हैं और जब इनके घर के सामने से गुजरते हैं तो गाहे-बगाहे इनकी मधुर आवाज कानों में आ ही जाती है। गणेश चतुर्थी के समय हर वर्ष जब सोसाइटी में गणपति जी की स्थापना की जाती है तो सुबह शाम लगातार दस दिन तक आलोक जी अपनी हृदयस्पर्शी मंत्रमुग्ध करती मधुर आवाज में ढोलक की थाप पर गणपति की आरती उच्चारते हैं। सोसाइटी के रखरखाव और सुरक्षा का कार्य सुचारु‌ हो इसमें भी आपका ध्यान लगा रहता है। बहुत ही सारगर्भित सलाह रहती है आपकी। हमने सदैव आपमें अनुशासन और सकारात्मकता का बोध पाया है।
आलोक गुप्ता का मानना है की हर काम सिस्टमैटिक हो। विधि विधान से हर वर्ष श्री गणेश जी की स्थापना हो और विसर्जन हो। सोसाइटी तरीके से चलती रहे। मितभाषी होने के पश्चात भी आपकी यह अच्छी सोच हम सब को सदा भाती रही है। अत्यंत सुशील और धर्मपरायण जीवनसंगिनी सीमा से आपकी आत्मीयता जगजाहिर है।
सुंदरकांड के समय सीमा द्वारा ढोलक की थाप विभोर कर देती है। आलोक और सीमा दोनों पति पत्नी को ढोलक बजाने में महारत हासिल है। अपने इकलौते पुत्र का नाम भी आलोक ने शंकर भगवान के नाम पर रखा है – ईशान। अपने माता-पिता का बहुत ही आज्ञाकारी और अनुपालन है होनहार ईशान। बुजुर्गों को सम्मान देने में आलोक को हमने सदैव अग्रणी पाया है। किसी के साथ अनबन भी हो जाए तो भी सम्मान देना नहीं भूलते आलोक। क्यों ना कहें आलोक को प्रतिभाओं के बहुआयामी। समाज में प्रतिष्ठित कर्मक्षेत्र में सफल और आध्यात्मिकता में अग्रणी आलोक सदैव स्वस्थ रहें प्रसन्न रहें। आपको आपके जन्मदिन की अनंत शुभकामनाएं। प्रभु आपका यशस्वी जीवन सुख समृद्धि एवं परोपकार से ओत प्रोत रखें।

रवीन्द्र मक्कड़ अनिल शुक्ला

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